वीआईपी नंबरों की ऑनलाइन बोली में खामियां!
11.5 लाख की रिकॉर्ड बोली व तीसरे नंबर पर 22 हजार की बोली लगाने वाली आवेदक एक ही महिला
लखनऊ। तू डाल-डाल…मैं पात-पात। कुछ ऐसी ही लुकाछिपी का खेल आजकल परिवहन विभाग और वीआईपी नंबरों की ऑनलाइन बिडिंग में हिस्सा लेने वाले लोगों के बीच चलता दिख रहा है। एक ओर जहां प्रदेश का परिवहन विभाग क्रमवार अपनी समस्त सेवाओं को ऑनलाइन करता जा रहा है ताकि प्रत्येक वर्ग के लोगों के बीच पारदर्शिता बनी रहे तो वहीं दूसरी तरफ इस हाईटेक सिस्टम को कै्रक करने वाले मास्टरमाइंड लोग विभागीय विशेषज्ञों से दो कदम आगे निकल गए। इसका नमूना हाल-फिलहाल लखनऊ आरटीओ में 0001 वीआईपी नंबर की ऑनलाइन बिडिंग प्रणाली में देखने को मिला। इस बिडिंग व्यवस्था में जो पहली ऑनलाइन तीन बोलियां लगायी गईं, उसमें से पहला और तीसरे नंबर का बोली लगाने वाले व्यक्ति एक ही था।
गत 13 अप्रैल को उक्त वीआईपी नंबर की ऑनलाइन बिडिंग प्रक्रिया शुरू हुई जिसमें सर्वाधिक बोली रिकॉर्ड 11.50 लाख रुपये की लगी। इस पहले बिडर की तरफ से जब कोई मैसेज नहीं आया तो उसकी सिक्योरिटी मनी जब्त कर ली गई और दूसरे आवेदक जिसने 11 लाख रुपये की बोली लगायी थी, उसे मौका दिया गया। उसने भी कहीं न कहीं हाथ खड़े कर दिए तो फिर तीसरे के लिए जद्दोजहद शुरू हुई जिसने वीआईपी नंबर 0001 के लिए 22 हजार की बोली लगायी थी। जब तीसरे आवेदक के विवरण को खंगाला गया तो परिवहन विभाग की टीम को सारा गड़बड़झाला समझ में आया।
इसका खुलासा तब हुआ जब सर्वाधिक बोली लगाने के बाद पहले और तीसरे व्यक्ति के विवरण को खंगाला गया तो उसकी मेल आईडी वही निकली जो पहले वाली बिडर की थी। यानि एक ही व्यक्ति ने एक ही मेल आईडी से दो बार वीआईपी नंबरों की ऑनलाइन बिडिंग प्रणाली में भाग लिया। हैरानी तो तब हुई कि यह गड़बड़ी शुरूआती चरण में न तो विभागीय एक्सपर्ट और न ही वो आईटी कंपनी के लोग पकड़ सके जो इन सारी तकनीकी व्यवस्थाओं को आकार दे रहें और क्रियान्वित कर रहे हैं।

No comments:
Post a Comment