श्रीलंका में रविवार को कोलंबो समेत कई जगहों पर हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद राष्ट्रपति मैथरीपाला सिरीसेना ने सोमवार आधी रात से आपातकाल लागू करने का ऐलान किया है। इन 8 बम धमाकों में मरने वालों का आंकड़ा सोमवार को 290 तक पहुंच गया। मरने वालों में दर्जनों विदेशी नागरिक भी हैं।अंग्रेजी समचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार आधी रात से श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा हो जाएगी। राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना आपातकाल की घोषणा करेंगे।
पिछले एक दशह में हुए इस सबसे दर्दनाक हमले के आरोप में पुलिस ने करीब 24 लोगों को गिरफ्तार किया है। सोमवार को यह भयानक मंजर देखने वाले लोगों कई सवालों में एक सवाल यह भी था कि आखिर भगवान कहां है? ईस्टर के मौके पर जब हजारों लोग प्रार्थना के लिए चर्च पहुंचे थे, उस समय हमलावरों ने चर्च और होटलों को निशाना बनाया। सुरक्षा बालों को सर्च ऑपरेशन के दौरान दो जिंदा बम भी मिले हैं, जिन्हें बाद में डिफ्यूज कर दिया गया। इस हमले की जिम्मेदारी अब तक किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन पुलिस ने शक के आधार पर 24 लोगों को गिरफ्तार किया है।
इस बीच भारतीय तटरक्षक दल कोस्ट गार्ट ने भी श्रीलंका से लगती सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है, आत्मघाती आतंकियों के श्रीलंका से बचकर निकलने की किसी भी आशंका को खत्म करने के लिए कोस्ट गार्ड ने यह कदम उठाया है।
हमले में घायल हुए शांता प्रसाद घायल बच्चों को कोलंबो के हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। इस हमले के बाद उनके जहन सिविल वॉर की याद ताजा हो गई। उन्होंने एएफपी से बातचीत में कहा, ‘मैं अपने साथ 8 घायल बच्चों को लेकर गया। इनमें दो बच्चियां 6 और 8 साल की थी। मेरी बेटियों की उम्र भी लगभग यही है। उनके कपड़े खून से लथपथ थे। एक दशक के बाद ऐसी हिंसा फिर से देखकर दिल दहल गया।’
इन धमाकों के बाद में श्रीलंका के लोगों के जहन में तीन दशक के सिविल वॉर का मंजर ताजा हो गया। जब करीब 1 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उन दिनों इस तरह के बम धमाके बेहद आम बात थी और लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने से भी डरते थे।
विदेश मंत्री ने ट्वीट कर बताया कि कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने 6 भारतीयों की मौत की जानकारी दी है। मृतकों के नाम लक्ष्मी, नारायण चंद्रशेखर, रमेश, पी एस रसायिना, के. जी हनुमंतरायप्पा और एम रंगयप्पा हैं। तीनों मृतकों के बारे में अभी और अधिक जानकारी जुटाई जा रही है।

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