कार्रवाई होती तो चपेटे में आते और भी बड़े लोग

लखनऊ। राजधानी के सिविल अस्पताल प्रशासन ने दवाओं के पकड़े जाने के मामले को ठंडे बस्ते में डालते हुए इसमें लिप्त कर्मचारियों, फॉर्मसिस्ट एवं डॉक्टरों को बचा लिया है। वहीं अस्पताल सूत्रों की माने तो अस्पताल के अफसर इन सभी घटनाओं से पहले से ही परिचित हैं। कार्रवाही होती तो इसके चपेटे में अस्पताल के कई अफसर समेत डॉक्टर भी आ सकते थे। इसलिए इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
क्या है मामला
सोमवार को ओपीडी संचालन के दौरान करीब 12 बजे अस्पताल परिसर में अस्पताल का ही एक कर्मचारी यहां की दवाइयों को लेकर बाहर बिक्री के लिए जा रहा था तभी डॉक्टरों ने उसे दवाओं के साथ पकड़ लिया। वहीं पकड़ा गया कर्मचारी डॉक्टरों के सामने आकर माफी मांगा और मामले को किसी तरह से दबा दिया गया। यह मामला दवाओं के कमीशन से जुड़ा हुआ बताया गया था और कहा गया था कि वर्तमान में मिल रहे कमीशन को बढाने के लिए इस तरह की धड़ पकड़ की गई। जिससे अस्पताल में बैठे बिचौलिए डरकर कमीशन बढ़ा दें। वहीं सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे ने इस तरह की किसी भी मामले की कोई जानकारी नहीं मिलने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया था। और कहा था कि अगर जानकारी मिलती है तो हम तत्काल कार्रवाई करेंगे।

No comments:
Post a Comment