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Thursday, 25 April 2019

वाराणसी से मोदी के खिलाफ पराजित अजय

पहले प्रियंका का हौव्वा, फिर हारे कैंडीडेट को उतारा!

प्रियंका के शुरूआती पॉलीटिकल कैरियर के मद्देनजर रिस्क उठाना नहीं चाहती कांग्रेस

रवि गुप्ता

लखनऊ। कांग्रेसी खेमे में लगातार कई दिनों से जो वाराणसी सीट को लेकर सस्पेंस बनाया जा रहा था वो अब खत्म हो गया। पहले तो इस सीट से पीएम मोदी के खिलाफ प्रियंका को उतारने का हौव्वा बनाया गया, लेकिन अचानक वहां के स्थानीय नेता व क्षेत्रीय बाहुबली माने जाने वाले अजय राय के नाम पर आखिरी मुहर लगा दी गई।

बता दें कि वाराणसी क्षेत्र से तीन बार विधायक रहें अजय राय गत लोस चुनाव में भी मोदी के खिलाफ चुनाव लडेÞ और महज कुछ हजार वोटों तक ही सिमट कर रह गए। हां इतना जरूर है कि 2009 के लोस चुनाव में वो भले ही सपा के टिकट पर लड़ते हुए तीसरे नंबर पर आए थे, मगर उन्होंने बीजेपी दिग्गज व विजयी प्रत्याशी डॉ. मुरली मनोहर जोशी और दूसरे स्थान पर पहुंचे बसपा के मुख्तार अंसारी को कड़ी चुनावी टक्कर दी थी। लेकिन पिछली बार चले मोदी लहर और अबकी बिना किसी पूर्व तैयारी के अचानक जिस तरह से उन्हें कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ दोबारा उतारा है, यह कहीं न कहीं जल्दीबाजी या महज राजनीतिक खानापूरी के मद्देनजर उठाया गया कदम लगता है। कुछ राजनीतिक जानकारों की मानें तो जिस दिन से प्रियंका को पूर्वी यूपी की कमान सौंपी गई, उसी समय से उनके वाराणसी सीट पर चुनाव लड़ने की चर्चायें जोर-शोर से कांग्रेसी खेमे से आने लगीं। तब प्रियंका ने कुछ स्पष्ट तो नहीं किया। मगर हाल-फिलहाल एक चुनावी जनसभा में जब उनका यह बयान आया कि अगर कांग्रेस अध्यक्ष कहेंगे तो वाराणसी सीट से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं, फिर इसके बाद तो जैसे वहां के स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच गजब का एक उत्साह व ऊर्जा का संचार होता दिखा। वहीं जब कांग्रेसजन वाराणसी सीट पर बनें रहस्य को लेकर राहुल के सिग्नल का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे कि तभी यहां को लेकर प्रियंका से जुड़े सारे अटकलों को विराम दे दिया गया और अजय राय को पीएम मोदी के खिलाफ प्रोजेक्ट कर दिया गया।

पार्टी जानकारों के अनुसार चूंकि प्रियंका अब पूरी तरीके से सक्रिय राजनीति में हैं, और पूर्वी यूपी की जिम्मेदारी उन्हें देकर उनका राजनीति कद भले ही कांग्रेस टीम में शीर्ष पर रखा गया हो पर अपने शुरूआती ‘पॉलीटिकल कैरियर’ के मद्देनजर वो किसी भी तरह से कोई भी रिस्क या खतरा लेने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में वाराणसी सीट पर पहले प्रियंका के नाम का डंका तो बजाया गया, मगर उपरोक्त परिस्थितियों पर गौर करते हुए कांग्रेस आलाकमान बैकफुट पर आ गई और एक औपचारिक विकल्प के तौर पर अपने पुराने प्रत्याशी को ही दोबारा चुनावी मैदान में उतार दिया।

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