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Wednesday, 24 April 2019

हर रविवार मच्छरों पर वार

रैली व गोष्ठी का आयोजन

लखनऊ। अपने समुदाय गाँव व कार्यालय को मलेरिया से मुक्त करें। यह तभी संभव हो पाएगी जब मच्छर न उत्पन्न हों। इसके लिए आवश्यक है कि मच्छर जनित परिस्थितियाँ हीं न उत्पन्न होने पाएँ। अतः अपने घर  के आस पास साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। यह बात बुद्धवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ नरेंद्र अग्रवाल ने प्रेस वार्ता के दौरान ​कही। डॉ. अग्रवाल ने बताया विश्व मलेरिया दिवस हर साल 25 अपैल को मनाया जाता हैं।हालाकिं इस साल इस थीम “ zero malaria starts with me” जिसका तात्पर्य है स्वयं को मलेरिया से मुक्त रखने की शुरुआत । साथ ही जन सामान्य तक इस संदेश तक पहुचाना है।

दो दिन पहले इन विभागों की हुई बैठक

जनवरी 2019 से अभी तक 47,613 बुखार से पीड़ित लोगों की रक्त पट्टिका संग्रह की गयी है | जिसमें 45 मलेरिया धनात्मक पाये गए, आमूल उपचार किया गया | नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय वेक्टर जनित नियंत्रण कार्यक्रम, लखनऊ डॉ. के.पी. त्रिपाठी ने बताया कि विश्व मलेरिया दिवस के आयोजन के संबंध में 6 विभागों स्वास्थ्य, शिक्षा, नगर निगम, पशुपालन, सिंचाई व ग्राम्य विकास विभागों की जिला समन्वयन समिति की बैठक 23 अप्रैल को आयोजित की गयी |डॉ. त्रिपाठी ने बताया मलेरिया रोग के प्रचार प्रसार केलिए विद्यालयों में जन जागरूकता रैली का आयोजन गुरूवार को सुबह 8 बजे हुसेड़िया चौराहे से एक जनजागरूकता रैली निकाली जाएगी और दोपहर 12 बजे मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में एक गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा |

इस स्लोगन के साथ होगा प्रसार प्रचार

आशा, एएनएम एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर—घर में हर रविवार – मच्छर पर वार स्लोगन का प्रचार प्रसार कर समुदाय को मच्छरों के काटने से बचें ,इसके लिए लोगों को प्रेरित करेंगे तथा यह जानकारी देंगे कि अपने घर में मच्छर जनित परिस्थितियाँ न उत्पन्न होने दें।जिला मलेरिया अधिकारी डी एन शुक्ला ने बताया कि सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर रैपिड रिसपाँस टीम गठित की गयीं हैं, जो संवेदनशील क्षेत्रों में जाकर आवश्यकतानुसार कार्यवाही संपादित करती है। | सभी आशाओं, एएनएम, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ एवं सहायकों को प्रशिक्षण दिया गया है।

क्या होता है मलेरिया

मलेरिया एक ऐसी बीमारी होती है जो एक परजीवी बैक्टीरिया प्लास्मोडियम द्वारा मादा एनाफिलीस मच्छर के काटने से होती है। यह बैक्टीरिया इतने छोटे होते हैं कि हम इन्हें आँखों से नहीं देख सकते हैं। इन बैक्टीरिया के व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं में फैलने से मलेरिया बुखार आता है। ये मच्छर पानी इकट्ठा करने वाले बर्तनों/टंकियों, छत पर पानी की टंकियों , साफ पानी, नालियों में पैदा होता है।

मलेरिया के लक्षण

मलेरिया में जाड़ा व कंपन देकर 1-2 दिन छोड़कर तेज बुखार आता है और यह पसीने के साथ उतरता है। यह बुखार प्रतिदिन 3 से 4 घंटे तक रहता है | इसके अतिरिक्त रोगी को एनारोक्सिया( खाना देखकर जी मिचलाना) व भूख कम लगती है और सिर तथा बदन में दर्द रहता है व उल्टियाँ होती हैं | बुखार उतरने के बाद थकावट व कमजोरी होती है |

कैसे करें बचाव

हर रविवार मच्छर पर वार कार्यवाही के अंतर्गत घर में कूलर, बाल्टी , घड़े तथा ड्रम का पानी साप्ताहिक अंतराल पर बदलते रहें। घर के आस पास सफाई का विशेष ध्यान रखें , पानी एकत्र न होने दें। पानी एकत्रित होने वाले स्थानों को मिट्टी से भर दें , यदि संभव हो तो कुछ बूंद मिट्टी के तेल/ जले हुये मोबिल आयल का अवश्य डा दें | सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें । शरीर पर मच्छर निरोधक औषधियों/नीम तथा सरसों के ते का खुले भागों पर लगाएँ, नीम की पत्ती का धुआँ करें व पूरी आस्तीन का कपड़ा पहनें |

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