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Friday, 19 April 2019

पूर्व सीएम मायावती के कैबिनेट सचिव के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले का कोर्ट ने लिया संज्ञान

लखनऊ। धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कैबिनेट सचिव रहे अनिल संत, समाज कल्याण निर्माण निगम के तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक आनंद संत और महाप्रबंधक एवं प्रशासन अजय कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ दाखिल रिवीजन अर्जी को स्थानीय अदालत ने सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है। कोर्ट ने धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार के आरोप के इस मामले में तीनों को 10 मई को हाजिर होने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने रिवीजनकर्ता से इस मामले में आरोपितों पर अभियोजन स्वीकृति के लिए पैरवी करने को भी कहा है।

यह आदेश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष जज अनिल कुमार शुक्ल ने सीजेएम, लखनऊ के 7 फरवरी 2013 के आदेश के खिलाफ सुनील गुप्ता की ओर से दाखिल रिवीजन याचिका पर पारित किया है। रिवीजनकर्ता का आरोप था कि समाज कल्याण निर्माण निगम में मुख्य महाप्रबंधक पद पर आनंद संत की नियुक्ति असंवैधानिक है। सीएम के तत्कालीन कैबिनेट सचिव अनिल संत ने निर्धारित योग्यता न होने के बावजूद विभागीय नियमावली में हेरफेर कर इस पद पर अपने छोटे भाई आनंद संत की प्रोन्नति करवा दी थी।

अदालत ने धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार के दूसरे मामले में भी आनंद संत व अजय कुमार श्रीवास्तव समेत समाज कल्याण निर्माण निगम, लखनऊ के प्रबंध निदेशक हीरालाल गुप्ता व देवेंद्र नाथ वर्मा तथा तत्कालीन चीफ इंजिनियर गिरीश वल्लभ मिश्रा के खिलाफ भी आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468 व 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/13 में संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इन सबके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के लिए रिवीजनकर्ता को पैरवी करने को कहा है। अदालत ने यह आदेश भी सुनील गुप्ता की ओर से ही दाखिल एक परिवाद पर दिया है। परिवाद में आनंद संत व अजय कुमार श्रीवास्तव के साथ ही हीरालाल गुप्ता व देवेंद्र नाथ वर्मा तथा गिरीश वल्लभ मिश्रा को विपक्षी पक्षकार बनाया गया था। सुनील का आरोप है कि वर्ष 2002 से 2012 के मध्य इन विपक्षीगणों वित्त नियमों को दरकिनार व बगैर शासनादेश के 2176.14 करोड़ का टेंडर अपने चहेतों को जारी कर दिया।

फर्जी अस्पताल में ताला लगा देख वापस लौट आए अफसर
लखनऊ। सर्जरी के दौरान महिला की आंत फटने की जांच के लिए बनी सीएमओ टीम ने गुरुवार को सिर्फ खानापूर्ति की। टीम कुर्सी रोड स्थित गौरा बाग में फर्जी अस्पताल तक पहुंची, लेकिन ताला लगा देख लौट आई, हालांकि दूसरी टीम ने ट्रॉमा सेंटर में भर्ती महिला मरीज का बयान लिया।

गौरा बाग में चल रहे फर्जी अस्पताल में कुर्सी के बाबुरिया गांव निवासी सुमन ने तीन महीने पहले सिजेरियन डिलीवरी से बच्ची को जन्म दिया था। इसके बाद उसे पेट दर्द होने लगा। अल्ट्रासाउंड में पता चला कि पेट में कॉटन छूट गया है। इस पर अस्पताल संचालक डॉ. संतोष ने 13 अप्रैल को फिर सर्जरी की, लेकिन इस बार आंत फट गई। इस पर घरवालों ने हंगामा किया तो अस्पताल संचालक फरार हो गया। इसके बाद से सुमन ट्रॉमा सेंटर में भर्ती है।

मामले की जांच के लिए सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने गुरुवार को डॉ. डीके बाजपेई और डॉ. केपी त्रिपाठी को अस्पताल भेजा। टीम मौके पर पहुंची, लेकिन वहां ताला लगा था। टीम ने अस्पताल संचालक डॉ. संतोष को फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठा। ऐसे में टीम लौट गई। अफसरों ने आसपास लोगों से पूछताछ करने और जानकारी जुटाने की जहमत नहीं जुटाई। यही नहीं, उन पुलिसकर्मियों से भी सम्पर्क नहीं किया, जो हंगामा होने पर मौके पर पहुंचे थे।

एसीएमओ डॉ. डीके बाजपेई ने गुरुवार को ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर महिला मरीज का बयान दर्ज किया। उन्होंने बताया कि फर्जी अस्पताल संचालक को जल्द ही सीएमओ कार्यालय बुलाकर बयान दर्ज करवाया जाएगा। इसके आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सीएमओ नरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि अभी जांच शुरू हुई है। रिपोर्ट आने के बाद ही कोई सख्त कार्रवाई होगी।

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