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Wednesday, 24 April 2019

युवा शक्ति से सच होगा सर्व-धर्म समभाव पर आधारित समाज का सपना : विश्व युवक केंद्र

सर्वधर्म समभाव का रास्ता संसद और विधानसभा से नहीं बल्कि विद्या के केंद्रों से निकलता है और अगर आपने सभी धर्मों का सम्मान करना नहीं सीखा तो भारत का भविष्य हमेशा अंधकार में रहेगा। युवा छात्रों को सामाजिक समरसता की स्थापना में योगदान हेतु प्रेरित करते हुये इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज से पधारे प्रोफेसर आनंद कुमार ने यह विचार विश्व युवक केंद्र द्वारा दिनांक 24 अप्रैल, 2019 को आयोजित सर्वधर्म समभाव परिचर्चा के उद्घाटन संबोधन में व्यक्त किए । इस एक दिवसीय परिचर्चा में विभिन्न समाज सेवी संगठनों तथा शैक्षणिक संस्थानों से आए हुए 200 युवा प्रतिनिधियों ने सक्रियता के साथ भाग लिया ।
परिचर्चा का उद्घाटन इंडिया रिप्रेजेंटेटिव ऑन एग्जीक्यूटिव बोर्ड यूनेस्को तथा NCERT के पूर्व निदेशक प्रोफेसर जे एस राजपूत , इंडियन स्टडीज ऑफ ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के फेलो प्रोफेसर आनंद कुमार और इंटरफेथ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक डा. मदन मोहन वर्मा के द्वारा दीप प्रज्वलित करते हुए किया गया।
युवाओं को संबोधित करते हुए विश्व युवक केंद्र के मुख्य नियंत्रक उदय शंकर सिंह ने कहा कि समाज में सर्वधर्म समभाव की मशाल जलाए रखने के लिए युवा स्वयंसेवकों को चेंजमेकर के रूप में तैयार करना आज के दौर की सबसे बड़ी आवश्यकता है। श्री सिंह ने कहा कि यह परिचर्चा इसी उद्देश्य के साथ आयोजित की गई है कि प्रतिभागी युवाओं को सामाजिक समरसता के मुख्य पहलुओं और विचारों से लैस करके सामुदायिक स्तर पर लोगों को इस अभियान के साथ जोड़ा जा सके ।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर जे एस राजपूत ने अपने संबोधन में सीखने की प्रक्रिया के अंतर्गत आने वाले अध्ययन, मनन, चिंतन और उपयोग इत्यादि चार प्रमुख तत्वों का वर्णन करते हुए बताया कि उस जानकारी का कोई महत्व नहीं है जिसको हम दूसरों की भलाई में उपयोग नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि विश्व में जितना ज्ञान इस समय में है उतना कभी नहीं था और प्रकृति के रहस्यों के बारे में जितनी जानकारी इस समय है उतनी कभी भी नहीं थी लेकिन यह भी सच है कि जितना अधिक अविश्वास, हिंसा, और जीवन को जीने में कठिनाइयां आज के दौर में आ रही हैं उतनी इसके पहले कभी नहीं थी। युवाओं को मानवता की सेवा करने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि यहां से सीखकर जाने के बाद यदि आप एक व्यक्ति का भी जीवन सुधार सकते हो तो समझ लो कि आपका जीवन सफल हो गया है। विशिष्ट अतिथि श्री मदन मोहन वर्मा ने सभी धर्मों के महापुरुषों द्वारा आपसी सद्भाव और सम्मान के प्रति दी गई शिक्षाओं को बहुत सरल भाषा में प्रतिभागियों को समझाया। श्री वर्मा ने कहा कि समय के साथ-साथ हमें अपने धर्मों के अंतर्गत आने वाली विसंगतियों को समझने की आवश्यकता है तथा उनको परिमार्जित करके एक नए समाज के गठन हेतु हमें धर्म के आदर्श स्वरूप को स्थापित करना होगा।
इस परिचर्चा के अंतर्गत आयोजित विषयान्तर्गत चर्चाओं के माध्यम से न्यू एज इस्लाम के संस्थापक आदरणीय सुल्तान शाहीन, दिल्ली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कार्यकारी सदस्य आदरणीय परमजीत सिंह चंडोक, इस्कॉन से पधारे आदरणीय बृजेंद्र नंदन दास, आर्चबिशप ऑफ दिल्ली से आदरणीय अनिल जोसेफ थॉमस, आचार्य सुशील आश्रम अहिंसा भवन से आदरणीय विवेक मुनी धर्मानंद जैन, तिब्बत हाउस (कल्चर सेंटर ऑफ हिज होलीनेस दलाई लामा) से सुश्री पूजा डबराल और बहाई कम्युनिटी ऑफ इंडिया से आदरणीय ए के मर्चेंट इत्यादि प्रबुद्धजनों ने विभिन्न धर्मों के द्वारा शांति और सद्भावना की शिक्षाओं पर आधारित विचार प्रतिभागियों के समक्ष रखे। आपस में विचार साझा करते हुये इन सभी विद्वजनों ने प्रतिभागियों के मन मे उठने वाले प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान भी खुले मंच के माध्यम से किया। इन विषयान्तर्गत चर्चाओं का समन्वय प्रोफेसर आनंद कुमार तथा तथा ए के मर्चेंट जी ने किया। इस परिचर्चा के अंतर्गत जहां एक ओर सर्वधर्म समभाव के प्रसार हेतु कई सारे प्रभावी वृत्त चित्रों का प्रदर्शन किया गया तो वहीं दूसरी ओर अस्मिता थियेटर ग्रुप के द्वारा सर्वधर्म सद्भाव विषय पर बेहद प्रभावी संदेश छोड़ते हुए नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से युवा कलाकारों ने समाज में आये दिन होने वाली हिंसक घटनाओं एवं धार्मिक विद्वेष के कारणों पर अत्यंत भावपूर्ण अभिनय द्वारा जोरदार प्रहार किया। सभी के दिलों को झकझोर देने वाले इस नाटक का निर्देशन और लेखन सुप्रसिद्ध रंगकर्मी अरविंद गौर ने किया। समापन संभाषण प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम के समन्वयक श्री रजत थॉमस ने यह आशा व्यक्त की कि इस परिचर्चा से मिली जानकारियों को सभी प्रतिभागी अपने व्यवहार में उतार कर सामाजिक समभाव की दिशा में नए प्रतिमान स्थापित करेंगे।इस अवसर पर सभी वक्ताओं एवं अतिथियों को विश्व युवक केंद्र की ओर से स्मृति चिन्ह एवं दुशाला प्रदान करते हुए सम्मानित किया गया।

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