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Monday, 22 April 2019

‘अटल’ की आदर्श राजनीति का ‘शत्रु’ उल्लंघन!

लखनऊ में अटल बिहारी की आदर्श बनाम बिहारी बाबू की छद्म राजनीति

अटल युग में ही शॉटगन का राजनीतिक कैरियर रहा शीर्ष पर

शत्रु खुद कांग्रेस में, पत्नी सपा में खड़े हुए कई सवाल

लखनऊ। जिस अटल युग में अभिनेता से राजनेता बने शत्रुघ्न सिन्हा का राजनीतिक कैरियर शीर्ष पर रहा, अभी उन्हीं बाजपेयी के लोकप्रिय संसदीय क्षेत्र लखनऊ में शॉटगन ने छद्म राजनीति की ऐसी मिसाल पेश की तमाम पार्टियों के पुराने व दिग्गज लीडर भी खामोश के साथ-साथ अवाक भी रह गए। जबकि दूसरी तरफ अटल बिहारी बाजपेयी ने यहां से रिकॉर्ड समय तक संसदीय जीत हासिल कर इसी लखनऊ की धरती पर ऐसी आदर्श राजनीति की मिसाल पेश की जिसका लोहा उनके विपक्षी व प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी मानते हैं।
पहले बीजेपी से दूरी, फिर कांगे्रस बनी मजबूरी और अब सपा से निभाई यारी…जी हां कुछ ऐसा ही पॉलीटिकल स्टंट हाल-फिलहाल राजधानी लखनऊ में दिखा। शत्रुघ्न सिन्हा ने कांग्रेस ज्वाइन किया और पटना साहिब से उम्मीदवार भी बना दिए गए, मगर लखनऊ में अपनी पत्नी पूनम सिन्हा जिन्हें बतौर सपा प्रत्याशी यहां से घोषित किया गया तो उनके नामांकन जुलूस में भी बढ़-चढ़कर शामिल हुए। ऐसे में गौर करने वाली बात यह है कि आखिर शत्रुघ्न कौन सी राजनीतिक पैंतरेबाजी करने के मूड में हैं। हालांकि सपा उम्मीदवार के नामांकन में उनके इस तरह से खुलकर शामिल होने को लेकर यूपी कांग्रेस के भी कई नेताओं ने दबे जुबां काफी विरोध भी जताया। पार्टी जानकारों की मानें तो आनन-फानन में लखनऊ सीट से कांग्रेस प्रत्याशी उतारे गए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस बात को लेकर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व से नाराजगी जाहिर की थी।

वैसे बता दें कि अटल बिहारी बाजपेयी के ही प्रधानमंत्रित्व काल में शत्रुघ्न को अपनी राजनीति को फलने और फूलने का खूब मौका मिला। उन्हें बाजपेयी के ही समय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण जैसे अति महत्वपूर्ण मंत्रालय की केंद्रीय जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी कड़ी में शत्रुघ्न को जहाजरानी मंत्रालय का भी कार्यभार सौंपा गया। यही नहीं पार्टी में शीर्ष स्तर पर शॉटगन को बीजेपी की संस्कृति व कला विभाग का सर्वेसर्वा भी बनाया गया। पटना साहिब से दो बार लोकसभा और राज्य सभा का भी मार्ग शत्रुघ्न को अटल के राजनीतिक युग में प्रशस्त हुआ। लेकिन अब राजधानी के ही कुछ पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं के अनुसार जब भी चुनाव आता है तो दलबदल का सिलसिल तो चलता ही है, पर जब दिवंगत अटल बिहारी की उसी पार्टी को बिहारी बाबू की अति आवश्यकता रही तो वो आदर्श राजनीति की समस्त सीमाओं को लांघकर केवल अपने राजनीतिक कैरियर की ओर ध्यान देना कहीं अधिक उचित समझे।
शॉटगन ने शुरू किया पॉलीटिकल लीग!

्रबीते काफी समय से पार्टी से जुड़कर राजनीति के क्षेत्र में हूं। लखनऊ में कई चुनाव आए और गए, मगर शत्रुघ्न सिन्हा की इस प्रकार की छद्म राजनीति का जवाब नहीं। यह कहना है लखनऊ में बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित पुरी का। पुरी के अनुसार सही मायने में शॉटगन के इस प्रकार के राजनीतिक कदम से लखनऊ में आईपीएल क्रिकेट की तर्ज पर पॉलीटिकल लीग का आगाज हुआ है, ऐसे में जहां अपना हित दिखा बस वहीं साध दिया। वहीं यूपी प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि हमारी पार्टी में पहले राष्ट्र, फिर दल और आखिर में व्यक्ति होता है मगर शत्रुघ्न का वर्तमान चरित्र ठीक इसके विपरीत प्रतीत हो रहा।

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