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Monday, 22 April 2019

सरकार के प्रस्ताव की धज्जियां उड़ा रहे विद्यालय

लखनऊ। गोसाईंगंज राजधानी में विद्यालयों की मनमानी से अभिभावकों पर भारी पड़ना शुरू हो गया उत्तर प्रदेश सरकार से लगाकर भारत सरकार जहां शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दे रही हैं और स्कूल चलो अभियान चलाया जा रहा बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का नारा देकर बालिकाओं को शिक्षा मुहैया कराए जाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा लेकिन ये तो सिर्फ सुनने को मिलता है हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
राजधानी के प्राइवेट विद्यालय अब बेलगाम हो गए अब ना तो सरकार का डर रहा और ना ही कुर्सी पर बैठे साहब का हर मां-बाप की इच्छा होती है कि उसका बच्चा अच्छी शिक्षा पा सके और बेहतर भविष्य बन सके लेकिन यह तो सोच सिर्फ सपना बनकर ही रह गई क्योंकि मोहनलालगंज सरोजनी नगर व गोसाईगंज क्षेत्र के प्राइवेट विद्यालयों की मनमानी अभिभावकों पर इस कदर हावी है कि मां-बाप चाह कर भी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दिलवा पा रहे क्योंकि उसका कारण है औकात से ज्यादा बच्चों की फीस ली जा रही अगर किसी तरह अभिभावक फीस का इंतजाम कर भी लेते हैं तो दूसरी बड़ी कठिनाई बच्चों की कॉपी किताबें इतनी महंगी कि अभिभावकों को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए कई बार सोचना पड़ता है माता पिता अपने बच्चों को जमाने के साथ चलने वाली सबसे अच्छी शिक्षा व शिक्षा दिलाने की चाह रखते हैं जिसके लिए उन्हें कन्वेंट स्कूल भेजकर शिक्षा दिलाने का सपना देखते हैं शिक्षा विभाग के अफसरों का शासन प्रशासन के उच्च पदों पर आसीन जिम्मेदारों की सुस्त रवैया के कारण क्षेत्र के निजी विद्यालय बेलगाम से हो गए हैं एक तरफ विद्यालय मनमानी फीस व कॉपी किताबें महंगे दामों पर वसूलने पर उतारू है तो वहीं दूसरी ओर कमाई का जरिया बना चुके विद्यालय मोटी कमाई के चक्कर में स्कूल में ही कॉपी किताबों की दुकान खोल रखी है जिससे बच्चों के माता पिता का खून और चूसा जा सके वहीं मजबूर माता पिता अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए महंगे दामों पर कॉपी किताबें खरीदने को विवश है।
इनमें से कई विद्यालय ऐसे भी हैं जो खास किस्म की कंपनियों की कॉपियां तक खरीदने की शर्त रखते हैं।
स्कूल बंद होने से पहले वसूली का खेल शुरू
स्कूल को कंपनी समझ कर स्कूल प्रशासन छुट्टी में भी बंद रहने के दौरान मई जून माह की फीस एवं ट्रांसपोर्ट खर्च नए सत्र की किताबों की लिस्ट भी अभिभावकों को पकड़ा ना शुरू कर दिया ताकि आसानी से जेब भरी जा सके।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनते ही फरमान जारी किया गया कि स्कूल और कन्वेंट विद्यालय अभिभावकों की जेब पर जबरन डाका नहीं डाल सकते लेकिन आदेश बेअसर रहा।
सरकार की हो रही फजीहत
योगी सरकार के सख्त निर्देश के बावजूद क्षेत्र के मोहनलालगंज गोसाईगंज सरोजनी नगर या कह पूरे राजधानी मे निजी स्कूलों की तानाशाही रुकने का नाम नहीं ले रहे नया सत्र शुरू होते ही विद्यालयों पोस्टर वार शुरू हो गया ड्रेस कमीशन देने वाली कंपनियों की किताबें मई-जून की फीस तथा नए सत्र की एडमिशन फीस जैसे फरमान सुनाए जाने लगे विद्यालयों के इन कारनामों को लेकर प्रदेश सरकार की भी जमकर फजीहत हो रही लोगों का कहना है कि सरकार के कहां गए निर्देश।
मजबूर मां बाप अपने बच्चों के सुंदर भविष्य के लिए एक बार फिर धन उगाही का शिकार हो रहे हैं।
विद्यालयों को लेकर सरकार के ये हैं प्रस्ताव
(1) यूपी सरकार द्वारा पास किए गए इस प्रस्ताव के तहत प्राइवेट स्कूल हर साल सिर्फ 7 से 8 फ़ीसदी फीस बढ़ा सकेंगे
(2) 12वीं क्लास तक स्कूल सिर्फ एक ही बार ही एडमिशन फीस ले सकेंगे
स्कूल ड्रेस के लिए ये है प्रस्ताव
योगी सरकार द्वारा मंजूर किए गए प्रस्ताव के मुताबिक कोई भी स्कूल अब 5 साल तक ड्रेस में बदलाव नहीं कर सकेंगे इसके साथ ही ड्रेस या फिर जूते मोजे लेने के लिए स्कूल द्वारा किसी भी स्टूडेंट को दुकान के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा सरकार का यह प्रस्ताव तो अभिभावकों के लिए राहत भरा रहा लेकिन प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को स्कूल प्रशासन आखिर अमल में क्यों नहीं ना रहा आखिर क्यों नहीं सरकार के आदेशों का पालन किया जा रहा इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार चाहे जितने प्रस्ताव पारित कर दे लेकिन निजी विद्यालय स्कूल अपनी मनमानी बंद नहीं करेंगे।

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