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Tuesday, 23 April 2019

पाटलीपुत्र से राजेश के उम्मीदवारी ने जहानाबाद वाली बना दी स्थिति , कहीं टक्कर से ही न आउट हो जाएं भाजपा

 भूमिहारों को उचित हिस्सेदारी नहीं देने एससी /एसटी, राम मंदिर नहीं बनाने ,युवाओं को रोजगार नहीं देने ,रेलवे लाइन और ट्रामा सेंटर का चालू नहीं होने पर भाजपा के वादा खिलाफी को मुद्दा बना रहे राजेश

>> जातिवाद के नाम पर युवाओं से अधिक बुजुर्गों के स्वाभिमान को प्रचार -प्रसार कर जगा रहे प्रत्याशी राजेश

पटना ( अ सं ) । बिहार और यूपी में जातिय समीकरण का बोल-बाला होता हैं । 2019 का लोकसभा चुनाव ,कमोबेश इसी ओर बढ़ चला हैं । इससे पाटलीपुत्रा लोकसभा क्षेत्र अलग नहीं हैं । बिहार में खासकर भूमिहार जाति ,गहराई से भाजपा से जुड़ा रहा हैं लेकिन इस बार की लोकसभा चुनाव में भूमिहार जाति का उचित स्थान नहीं मिलने से काभी आक्रोश हैं । प्रथम चरण के चुनाव सम्पन्न होते ही भाजपा के शीर्ष को इसका एहसास भी हो गया और आनन-फानन में पूर्व केन्द्रीय मंत्री सी पी ठाकुर और एमएलसी सचितानंद राय को दिल्ली बुलाया गया और आश्वासन का बाण चलाकर आश्वस्त करने के लिए प्रचार -प्रसार और बयानबाजी का निर्देश दिया गया । लेकिन भाजपा के शीर्ष नेताओं का यह मालूम नहीं की भूमिहारों का कोई एक नेता नहीं होता और स्वाभिमान में आ जाएं तो घर-घर नेता संघर्ष के लिए तैयार हो जाता हैं । इस बार की लोकसभा चुनाव में भूमिहारों की उचित हिस्सेदारी नहीं मिलना खासकर भाजपा के साथ एनडीए को भी नुकसान पहुंचाने जैसा साबित हो रहा हैं ।
       बीते मंगलवार को जहानाबाद के प्रत्याशी के रूप में अरूण कुमार ने नामांकन किया तो भूमिहारों की भीड़ ने यह साबित हो गया की भूमिहार जाति के लोग एनडीए और यूपीए के साथ नहीं बल्कि भूमिहार उम्मीदवार के साथ गोलबंद हैं । सोशल मीडिया मीडिया पर भी जाति का झंडा गोलबंद हो रहा हैं । पाटलीपुत्रा, यादव जाति बहुमूल्य क्षेत्र हैं । यादव जाति पर एक हद तक राजद का कब्जा माना जाता रहा हैं ।दूसरे स्थान पर भूमिहार जाति आता हैं । भूमिहार, कुशवाहा और अति पिछड़ा और यादव का कुछ वोट भाजपा के पाले में आता है तब जाकर भाजपा जीतने में कामयाब होती हैं । बिहार में भूमिहारों की उचित हिस्सेदारी नहीं मिलने पर पाटलीपुत्रा में भी आक्रोश और बगावत जैसी स्थिति हैं और इसे असरदार ,प्रदर्शन करने में पाटलीपुत्रा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राजेश कुमार दिख रहे हैं । 
      राजेश कुमार पहले भाजपा में थे और युवा वर्ग में अच्छी पकड़ रखें हैं । अपने जाति को सही सम्मान नहीं मिलने पर बीजेपी से सबसे पहले राजेश कुमार ने ही बगावत शुरू किया था। इसलिए बीजेपी ने राजेश कुमार को निलंबित कर दिया । राजेश कुमार कहते रहे हैं की पहले हमारा जाति ,वर्ग भाई है तब पार्टी हैं । मेरे जाति का ही जब विकास नहीं होगा ,उचित सम्मान नहीं मिलेगा तो ऐसी पार्टी हमारा दुश्मन हैं । राजेश कुमार का दावा हैं ,भूमिहार का बेटा हूं और भूमिहार का भाई, बहन ,माता ,चाचा सब साथ हैं और बुजुर्गों का आशीर्वाद मिला हुआ हैं । मैं भूमिहार जाति के स्वाभिमान की लड़ाई पूर्व से लड़ रहा हूं और लड़ता रहूंगा।
    पाटलीपुत्रा के प्रत्याशी राजेश कुमार अपना दल-बल के साथ धमाकेदार प्रदर्शन कर रहे हैं और बिहटा, नौबतपुर, बिक्रम, पालीगंज में प्रचार -प्रसार शुरू कर दिये हैं और भाजपा पर वादा खिलाफी का आरोप लगा रहे हैं । राजेश कुमार ,भाजपा में भूमिहारों के उपेक्षा ,एससी/एसटी को और सख्ती से लागू कर समाज को कमजोर करने ,पड़तारित करने ,राम मंदिर नहीं बनाने का आरोपी भाजपा को बता रहे हैं । वहीं भाजपा सांसद रामकृपाल यादव पर आरोप लगा रहे हैं की ट्रामा को चालू नहीं कराया ,रेलवे लाइन की दिशा में कोई काम नहीं किये । जनता की आवाज को संसद भवन में नहीं उठाते ,जो थोड़े बहुत विकास हुआ भी उसमें लूट मचा और उसी लूट का भागीदारी रखने वाले कुछ भाजपा के युवा कार्यकर्ता इनके आगे-पीछे हैं । जबकि चिकित्सीय व्यवस्था ,शिक्षण व्यवस्था ,कृषि व्यवस्था सब दम तोड़ रहीं हैं और सांसद जी सस्ती लोकप्रियता के लिए जन्मदिन ,विवाह ,श्राद्ध में ढेकार लगाकर अपने को हितैसी बताते हैं । भूमिहार उम्मीदवार के रूप राजेश कुमार का दावा है की वह अपने जाति के भाईयों ,बहनों और बुजुर्गों के आशीर्वाद से जीतेंगे। अब राजेश कुमार के दावे की सच्चाई में कितना दम है यह तो चुनाव के बाद आनेवाला परिणाम बताएंगा लेकिन ऐसी स्थिति में एक बात जरूर कहां जा सकता हैं की अगर भूमिहार वोटरों में सेंघमारी हुई तो कहीं टक्कर से ही भाजपा आउट न हो जाएं ।

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