डफरिन अस्पताल में नई बालरोग ओपीडी का उद्घाटन
लखनऊ। डफरिन अस्पताल के प्रथम तल पर आज नई बालरोग ओपीडी का उद्घाटन किया गया। इसमें पहले दिन लगभग 200 बच्चों का इलाज किया गया। मरीजों को अलग-अलग कमरों के चक्कर से छुटकारा देने के लिए आयुष एवं वैक्सीनेशन क्लीनिक भी बनाई गई है। ओपीडी का उद्घाटन अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरा जैन ने किया। इस मौके पर सीएमएस डॉ. लिली सिंह, वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान, डॉ. मोहित समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।
बच्चों की मौत ज्यादातर डायरिया से
डायरिया से बचाव विषय पर आयोजित सीएमई में डफरिन अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान ने कहा कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाली मौत ज्यादातर डायरिया से होती है। डायरिया होने पर ओआरएस और जिंक का घोल जरूर देना चाहिए। साथ ही मां का दूध नवजात के लिए बहुत गुणकारी साबित होता है। इससे उन्हें दस्त होने से बचाया जा सकता है।
नहीं देनी चाहिए एंटीबायोटिक दवाइयां
उन्होंने बताया कि बच्चे को अगर तीन या तीन से ज्यादा पतले दस्त आ जाएं तो उसे डायरिया की समस्या हो सकती है। यहां रोजाना आने वाले बच्चों में 15 से 20 को डायरिया की शिकायत होती है। डायरिया होने पर बच्चों को एंटीबायोटिक दवाइयां नहीं देनी चाहिए। दस्त के साथ खून आने पर ही डॉक्टर की सलाह पर एंटीबॉयोटिक दें। बच्चे को जिंक की टेबलेट 14 दिन तक देना चाहिए। छह माह से कम उम्र के बच्चे को 10 एमजी और छह माह से ऊपर के बच्चे को 20 एमजी जिंक की टेबलेट दें। दस्त के दौरान बच्चे का खाना बंद न करें। मां का दूध व हल्का आहार भी दें

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