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Tuesday, 2 July 2019

सेहत और पाचन के लिए बेहतर है बकरी का दूध

वैसे तो किसी भी नवजात के लिए मां का दूध ही सबसे अच्छा और श्रेष्ठ माना जाता है। लेकिन कई बार किन्हीं वजहों से अगर मां बच्चे को दूध नहीं पिला पाती या फिर मां का दूध इतना नहीं होता कि बच्चे का पेट भर पाए तो बच्चे को ऊपर का दूध यानी फ़ॉर्म्युला मिल्क दिया जाता है। फ़ॉर्म्युला मिल्क को लेकर हाल ही में हुई एक स्टडी की मानें तो बकरी के दूध से बना फ़ॉर्म्युला मिल्क नवजात के लिए अच्छा साबित हो सकता है।

इस स्टडी की मानें तो 

– गोट मिल्क फ़ॉर्म्युला यानी बकरी के दूध से तैयार फ़ॉर्म्युला मिल्क में स्ट्रॉन्ग प्रीबायॉटिक और ऐंटि-इंफेक्शन प्रॉपर्टीज होती है
– नवजात शिशु को पेट और आंत से जुड़े कई तरह के इंफेक्शन्स से बचा सकता है
– इस रिसर्च में एक अलग और खास तरह के प्रीबायॉटिक के बारे में चर्चा की गई है
– यह प्रीबायॉटिक गुड बैक्टीरिया के ग्रोथ को बढ़ाकर बच्चे की आंत को हानिकारक बैक्टीरिया से बचाता है

गोट मिल्क फ़ॉर्म्युला में 14 तरह के प्रीबायॉटिक्स होते हैं
ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित इस रिसर्च में बकरी के दूध से बने फ़ॉर्म्युला मिल्क में एक दो नहीं बल्कि पूरे 14 तरह के प्राकृतिक रूप से बनने वाले प्रीबायॉटिक्स पाए। इनमें से 5 तरह का प्रीबायॉटिक मां के दूध में भी पाया जाता है। वैसे तो ब्रेस्टफीडिंग के विकल्प के तौर पर गाय के दूध से बने फ़ॉर्म्युला का इस्तेमाल ज्यादा प्रचलित है लेकिन कई मामलों में बकरी के दूध को मां के दूध के ज्यादा करीब माना जाता है।

हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म कर गुड बैक्टीरिया को बढ़ाता है
बच्चों में होने वाले डायरिया के करीब एक तिहाई केसेज हानिकारक बैक्टीरिया पैथोजेनिक ई कोलाई की वजह से होते हैं जो नवजात की आंत में विकसित हो जाते हैं। बकरी के दूध में मौजूद प्रीबायॉटिक गुड बैक्टीरिया को बढ़ाता है जिससे हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद मिलती है। साथ ही बकरी के दूध में मौजूद ऐंटि-इंफेक्शन प्रॉपर्टी भी नवजात के सेहत के लिए बेहतर माना जाता है।

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