
बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस कालाष्टमी चंद्रमा, शनि और मंगल एक साथ धनु राशि में स्थित रहेंगे। साथ ही इस दिन धन का कारक ग्रह शुक्र मेष राशि में है और बृहस्पति तुला राशि में रहेंगे। तो आइए जानते हैं कैसे करें कालाष्टमी की पूजा।
पूजन करने की विधि- शाम के समय भैरव का विधिवत पूजन करें। सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं, गुगल धूप करें, केसर का तिलक लगाएं, लाल फूल चढ़ाएं। मीठी रोटी का भोग लगाएं। किसी माला से इस विशेष मंत्र का यथासंभव जाप करें। जप पूरा होने के बाद 4 मीठी रोटी कुत्ते को डालें।
पूजा करने का शुभ मुहूर्त: शाम 19:05 से रात 20:05 तक।
पूजन मंत्र: ह्रीं उन्मत्त भैरवाय नमः॥
उपाय
कालाष्टमी की रात को उड़द के आटे की मीठी रोटी बनाएं। उस रोटी पर तेल लगाएं।
उसके बाद किसी कुत्ते को खिलाएं। काले कुत्ते को खिलाना काफी शुभ माना जाता है।
प्रेम विवाह में सफलता के लिए भोजपत्र पर प्रेमी का नाम लिखकर भैरव मंदिर में चढ़ाएं।
पारिवारिक समृद्धि के लिए भैरव पर अर्पित मौली घर के मेन गेट पर बांधें।
क्रूर ग्रहों के प्रभाव से छुटकारे पाने के लिए भैरव पर अर्पित 4 इमरती कुत्तों को खिलाएं।
ऐसा करने से कालभैरव की कृपा आपके ऊपर बनी रहेगी और धन लाभ के योग बनेंगे।

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