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Tuesday, 15 May 2018

किसानों के लिए पपीते की खेती फायदेमंद साबित

लखनऊ। किसानों के लिए पपीते की खेती करके आसानी से पपीते की खेती करके किसान अधिक फायदा उठा सकते है कि बात किसानों को किसान वैज्ञानिकों ने बताई है।किसानों को पपीते की खेती के बारे में विस्तार से बताया कि पपीते के पेडों के ऊपरी हिस्से में पत्तों से घिरे हुए पपीते के फल आते हैं।ताकि यह पत्तों का घेरा कोमल फलों को बना सके कि सरक्षा कर सके।

कच्या पपीता हरे रंग ” का और पकने के बाद हरे पीले हो जाते हैं ।पपीते की नई प्रजाति के पपीते के बीज के पपीते की किस्में की इन बातों को ध्यान रखें यह कहना किसान विशेषज्ञों ने कही और पपीते की नई प्रजातियों में एक पपीते का वजन लगभग 400 से 500 ग्राम से लेकर एक किलो ग्राम तक हो सकता है ।पपीते के वर्तमान में दस प्रतिशत इलाके पेड़ नर और मादा के रुप में अलग अलग होते हैं ।लेकिन कभी कभार एक ही पेड़ में दोनों तरह के फूल खिलते पपीते के अच्छे उत्पादन के लिए हवाईन और मेक्सिकन पपीते समय पर सिंचाई प्रसिद्ध हैं। पानी की कमी तथा निराई गुड़ाई पपीते “भी अत्यन्त स्वादिष्ट होते हैं। वर्ष 2017 से पपीते के उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ा था। अलग-अलग किस्मों के पपीतों पर बुरा असर पड़ता था। दक्षिण भारत की इनके स्वाद में थोड़ी बहुत भिन्नती भी,जलवायु में जाड़े में 8-10 वित्र तथा होती है। पपीता स्वास्थ्य वर्द्धक तथा गर्मी में एक सप्ताह के बाद पपीते के खेतों में पानी में सिंचाई देना जरूरी होता है।

विटामिन ए-से भरपूर फल होता उत्तर भारत में अप्रैल से जून तक है पपीते का वानस्पतिक नाम केरिका सप्ताह में दो बार तथा जाड़े में 15 दिन पपाया है। पपीता एक बहुलिीस पौधा के अंतर पर सिंचाई करनी चाहिए। यह है ।तथा मुरकटय से तीन प्रकार के ध्यान रखना आवश्यक है कि पानी तने लिग नर मादा तथा नर व मादा दोनों को छूने न पाए अन्यथा पौधे में गलने लिग एक पेड़ पर होते हैं पपीता के की बीमारी लगने का अंदेशा रहेगा। पिके व कच्चे फल दोनो उपयोगी होते इसलिए तने के आसपास मिट्टी है। कच्चे फल से पपेन बनाया जाता ची रखनी चाहिए। पपीता का बाग है। जिसकाजगत सौन्दर्य में व्यापक जगत प्रयोग में किया तथा सिंचाई साफ सुथराके बाद रहे पेड़ों इसके के लिए चारो प्रत्येक तरफ जाता है।

पपीता एक सदाबहार मधुर हल्की गुड़ाई अवश्य करनी चाहिए। फल है,जो स्वादिष्ट और रुचिकर होता पपीते के अच्छे उत्पादन के लिए है। यह हमारे देश में सभी जगह उत्पन्न सिंचाई का सही इंतजाम बेहद जरूरी होता है। है। गर्मियों में 6-7 दिनों के अंदर पर पपीता बहत ही जल्दी बढ़ने वाला पेड़ और सर्दियों में 10-12 दिनों के अंदर है। साधारण जमीन थोड़ी गरमी और सिंचाई करनी चाहिए। बारिश के अच्छी धूप मिले तो यह पेड़ अच्छा मौसम में जब लंबे समय तक बरसात पनपता हैपरन्तु इसे अधिक पानी या न हो,तो सिंचाई की जरूरत पड़ती है। जमीन में क्षार की ज्यादा मात्रा बस पानी को तने के सीधे संपर्क में नहीं नहीं आती। इसकी पूरी ऊंचाई करीब आना चाहिए इसके लिए तने के पास 12से15 फुट तक होती है। चारों ओर मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए।

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