आदमखोर कुत्ते अब तक 13 बच्चों की जान ले चुके हैं मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर की है दहशत का आलम ये है कि अब प्रशासन ने बच्चों के घर तक से बाहर निकलने पर रोक लगवा दी है खौफ इतना कि खुद मुख्य़मंत्री को उस इलाके का दौरा करना पड़ा।
भारत मे तीन करोड़ आवारा कुत्ते हैं कुत्तों के काटने से हर साल देश में 20 हज़ार लोगों की मौत होती है मौत की वजह बनता है रैबीज़ जिसके सबसे ज्यादा मामले भारत में पाए जाते हैं आंकड़ों पर नजर डालें तो ये पूरी दुनिया का 35 फ़ीसदी है पर अब सवाल यही है कि क्या अब कुत्ते आदमख़ोर हो रहे हैं? क्या सीतापुर में बच्चों को मारने वाले आदमख़ोर कुत्ते हैं? क्या 13 बच्चों को आदमख़ोर कुत्तों ने मारा?
बच्चों घर के अंदर ही रहना बाहर मत निकलना बाहर शिकारी कुत्ते हैं और प्रशासन नाकारा हैं उससे इतना भी नहीं हो सकता कि वो 6 महीने बीतने के बाद भी ये पता लगा सकें कि सीतापुर में 13 बच्चों को मार डालने वाले आदमखोर कुत्ते ही हैं या कोई और जी हां मई के महीने में खैराबाद इलाके में कुत्तों ने अपना 7वां शिकार बना लिया है और इस तरह नवंबर से लेकर अब तक 13 मासूमों की जान जा चुकी है।
पैसे से ज़ख्म भर जाता तो दुनिया में दुखी लोगों की तादाद बहुत कम होती मुख्यमंत्री जी… आप तो ये इंतजाम कीजिए कि अब किसी मां की गोद सूनी ना हो अब कोई मासूम जानवरों का निवाला ना बने क्योंकि लखनऊ से लेकर मथुरा तक के तमाम काबिल अफसर और सीतापुर प्रशासन मिलकर भी इन मौतों के आंकड़ों को रोक नहीं पा रहा है और उल्टा प्रशासन ने खैराबाद में बच्चों के लिए कर्फ्यू लगा दिया है।
आदमखोर कुत्तों ने किया 13वां शिकार सिर्फ मई माह में कुत्तों ने 7 मासूम बच्चे मार डाले इसके बाद 10 साल की मासूम कुत्तों का निवाला बनी इस तरह से अब तक कुल 13 जिंदगियों का काल बन चुके हैं ये कुत्ते इनकी वजह से सीतापुर में मासूमों के लिए ‘कर्फ्यू’ का माहौल है।
पुलिसवाले के अलावा ब्लॉक डिवेलपमेंट ऑफिसर, ग्राम प्रधान, लेखपाल, डॉक्टर्स, टीचर्स, कोटेदारों और ना जाने किन किन लोगों की समितियां बनाई गई हैं कि आदमखोर कुत्तों का कहर खत्म हो मगर पुलिस एनकाउंटर, ड्रोन कैमरे से नज़र और दूरबीन का असर सब बेकार साबित हो रहा है कुत्ते अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आ रहे अब पुलिस प्रशासन का कुत्तों पर काबू करना मुश्किल हो रहा है, तो वो बच्चों की पढ़ाई लिखाई और खेल कूद बंद करके घर में ही कैद रहने की सलाह दे रहे हैं।
ये इसलिए क्योंकि इतनी मुस्तैदी के बाद भी खैराबाद इलाके में कुत्तों ने 10 साल की मासूम रीना को अपना शिकार बना लिया मासूम रीना गांव के बाहर खेतों में अपने परिवार के साथ गेहूं की बालिया बीनने गई थीं इस दौरान कुत्तों के झुंड ने मासूम पर हमला बोल दिया और नोंच-नोचकर उसे मार डाला मासूम रीना की मौत से गुस्साए लोग का गुस्सा फूट पड़ा और पूरा का पूरा गांव शव के साथ लाठी-डंडे लेकर सड़क पर उतर आए लोगों की भीड़ ने नेशनल हाईवे 24 को जाम कर दिया।
पुलिस-प्रशासन ने इन लोगों को समझाने की कोशिश तो बहुत की मगर ये लोग भी कब तक समझेंगे क्योंकि 13 मासूमों की मौतों के बाद भी अब तक प्रशासन एक भी शिकारी कुत्ते का पता नहीं लगा पाई है पता लगाना तो दूर ये तक नहीं पता चल पाया है कि बच्चों पर हमला करने वाले कुत्ते ही हैं या कोई और जंगली जानवर उलटा पुलिस लोगों पर लाठियां बरसा कर उन्हें काबू करने की कोशिश कर रही है ये आलम तब है जब खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस इलाके का दौरा कर चुके हैं मुख्यमंत्री योगी के इस दौरे के महज़ 48 घंटे के अंदर कुत्तों ने मासूम रीना को अपना शिकार बनाया।
इलज़ाम है कि नवंबर से लेकर अब तक करीब 6 महीनों में कुत्ते यहां 12 मासूम बच्चों को अपना शिकार बना चुके हैं जिनमें से 6 बच्चों को तो सिर्फ मई के शुरूआती हफ्ते में ही जान गंवानी पड़ी।
मई में अब तक शावनी, खालिद, कोमल, गीता, वीरेंद्र और कासिम को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया बेहद अजीब सी हैं ये घटनाएं गली के कुत्तों का अचानक आदमखोर हो जाना हैरान करने वाला है बस इसीलिए जितनी मुंह उतनी बातें हो रही हैं।
सीतापुर के एसपी का कहना है कि कुत्तों को गोश्त खाने को नहीं मिल रहा है इसलिए वो इंसानों को काट रहे हैं पर सवाल ये है कि बूचड़खाने तो पूरे यूपी में बंद हैं तो गुस्से में सिर्फ सीतापुर के ही कुत्ते क्यों? और माना कि इन कुत्तों में खाना ना मिल पाने का गुस्सा है तो फिर ये बच्चों के गर्दन पर सिर्फ हमला कर भाग क्यों जाते हैं? पशु कल्याण अधिकारी सौरभ गुप्ता का कहना है कि अगर वो कुत्ते आदमखोर हो गए हैं तो, उन कुत्तों ने केवल काटा क्यों, खाया क्यों नहीं?
ऐसा नहीं है कि गली के कुत्ते आदमखोर नहीं हो सकते लेकिन ऐसा तभी होता है जब वो दिमागी संतुलन खो बैठें पर एक साथ झुंड का झुंड पागल हो जाए ये भी तो मुमकिन नहीं है तो सवाल ये है कि कहीं ऐसा तो नहीं जिन्हें गांव वाले कुत्ता समझ रहे हैं वो कोई और है? क्योंकि हमलावर कुत्ते ही हैं इस बारे में कोई सही-सही नहीं कह रहा एक चश्मदीद महिला का कहना है कि कुत्ते की तरह थे मगर अजीब थे कुछ गांव वालों का कहना है कि जो कुत्ते बच्चों पर हमला कर रहे हैं वो उनकी गली के कुत्ते नहीं बल्कि खेतों और बागों में छुपकर रहने वाले बाहरी शिकारी कुत्ते हैं जिनकी भागने की रफ्तार भी ज़्यादा है और वे बहुत खूंखार हैं।
सीतापुर के खैराबाद के 10 किमी के दायरे में जितने भी गांव हैं वहां आतंक मचा हआ है गांव वालों के मुताबिक सिर्फ बच्चों को ही नहीं बल्कि गाय और बकरियों को भी शिकार बनाया जा रहा है सैकड़ों की तादाद में बकरियों और दर्जनों की तादाद में गाय पर इन कुत्तों ने जानलेवा हमला किया है एक अधिकारी का कहना है कि हमलावर कुत्ते नहीं भेडिये हो सकते हैं।
दहशत का आलम ये है कि बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है किसानों ने खेतों में जाना बंद कर दिया है और जो जा भी रहे हैं वो मचान के ऊपर चढ़े बैठे हैं पर सवाल ये है कि क्या हमलावर सचमुच में कुत्ते ही हैं? या फिर कोई और इस आतंक की तह तक पहुंचना ज़रूरी है।


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