नई दिल्ली। 24 अप्रैल के बाद तेल कंपनियों ने पहली बार रेट में बदलाव किया है। पहले से ही आशंका बनी हुई थी कि कर्नाटक चुनाव होते ही ऐसा होगा। 12 मई को चुनाव हो चुके हैं और इसके एक दिन बाद ही तेल के दाम बढ़ गए हैं। पेट्रोल-डीजल के दामों में 19 दिन बाद बदलाव किया गया है। दिल्ली में पेट्रोल 17 पैसे वहीं डीजल 21 पैसे महंगा हुआ है। कोलकाता और मुंबई समेत बाकी शहरों में भी पेट्रोल के दाम बढ़े हैं।
पेट्रोल और डीजल के दाम 24 अप्रैल को 13 पैसे बढ़ाए गए थे। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 78.84 डॉलर प्रति बैरल के आधार पर ये दरें निर्धारित की गई थीं जो बढ़कर 82.98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची गईं।
इस दौरान इंटरनेशनल मार्केट में डीजल भी 84.68 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 88.63 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
डॉलर के मुकाबले रुपया 66.62 के स्तर फिसलकर 67 पर आ गया जिससे इंपोर्ट महंगा हुआ।
बावजूद इसके भारत में तेल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया। तेल कंपनियों को 500 करोड़ का नुकसान अनुमान है कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को इस दौरान 500 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा है।
आगे क्या होगा ?
क्रूड महंगा होने और रुपए में गिरावट के बावजूद कंपनियों ने 19 दिन तक दाम स्थिर रखे। ऐसे में अब आशंका है कि नुकसान की भरपाई करने के लिए लगातार बढ़ोतरी की जाएगी।
गुजरात चुनाव के बाद भी ऐसा हुआ था
पिछले साल गुजरात चुनाव से पहले इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन जैसी सरकारी कंपनियों ने वहां करीब 15 दिन तक लगातार 1-3 पैसे की कटौती की थी। गुजरात में 14 दिसंबर 2017 को विधानसभा चुनाव हुए थे। वहां भी वोटिंग के बाद तेल कंपनियों ने दाम बढ़ाने शुरू कर दिए।
अधिकारियों ने चुनाव से दो दिन पहले चुप्पी तोड़ी
लंबे समय तक कीमतों में बदलाव नहीं करने की वजह को लेकर अधिकारियों ने पहले तो कई दिन तक चुप्पी साधे रखी। फिर कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले 10 मई को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा कि ये सिर्फ संयोग है। दाम नहीं बढ़ाने के पीछे मकसद ये था कि कीमतों में स्थिरता लाई जाए। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बढ़ने पर उन्होंने कहा कि ये फंडामेंटली सपोर्टिव नहीं हैं।
पेट्रोल 56 महीने के हाई पर डीजल सबसे उच्च स्तर पर
16 अप्रैल को दिल्ली में पेट्रोल 55 महीने के हाई पर वहीं डीजल अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। ये दोनों रिकॉर्ड अभी तक बरकरार हैं। यानि 16 अप्रैल को जो भाव थे पेट्रोल-डीजल उनसे ऊपर ही जा रहे हैं कम नहीं हुए हैं।
सुभाष चंद्र गर्ग, इकोनॉमिक अफेयर्स सेकेट्री पेट्रोल और डीजल पर ड्यूटी 1-1 रुपए भी घटाई जाती है तो सरकार को 13,000 करोड़ का घाटा होगा, जबकि कीमतें 1-2 रुपए बढ़ने से महंगाई प्रभावित नहीं होगी।
धर्मेंद्र प्रधान, पेट्रोलियम मंत्री कीमतों पर नजर रखी जा रही है। एक्साइज ड्यूटी नहीं घटाई जाएगी। राज्यों को टैक्स में कटौती कर उपभोक्ताओं को राहत देनी चाहिए।
कीमतों की हर रोज समीक्षा शुरू होने के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि लगातार 19 दिन तक कोई बदलाव नहीं किए गए।
17 जून 2017 से रोजाना समीक्षा का फॉर्मूला अपनाया जा रहा है। इससे पहले हर महीने की पहली और 16 तारीख को रेट तय होते थे।
पेट्रोल-डीजल के दाम अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के आधार पर तय होते हैं। हर रोज सुबह 6 बजे से नई दरें लागू होती हैं। जिस रेट पर उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल मिलता है उसमें एक्साइज ड्यूटी, राज्यों के टैक्स और डीलर कमीशन शामिल होता है।


No comments:
Post a Comment