लखनऊ: आर्थिक अभाव कोझेल कर भी बड़ा सिंगर बनना बहुत ही परिश्रम एवं लगन का काम होता है गांव से पढ़ लिखकर मुंबई में फिल्मों में काम किया है गांव के बृजेश ने अपने आभाव को भी अपना हथियार बनाकर अपनी प्रतिभा को निखारनेका काम किये बताते चलें कि गांव की मिट्टी में जन्मे पढ़े लिखे तथा खेती-बारी करके परिवार का भरण पोषण करने वाली फिल्मों में सिंगर का काम करने वाले कोई दूसरा नहीं . बृजेश शांडिल्य है. जो उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के एक साधारण परिवार में जन्म लेकर भी फिल्म जगत मेअपना स्थान बना चुके हैं मुंबई से घर आने पर तरुण मित्र से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि उनको बचपन से हीसिगर बनने काशौक था मुंबई जाने के बाद निखारआया अपने भाइयों में सबसे बड़े बृजेश कुमार के पिता एक साधारण किसान हैं बृजेश के आरंभिक शिक्षा गांव के प्राइमरी स्कूल में हुई ग्रेजुएशन भी गांव के पास हुआपिता का हाथ बड़े होनेके कारण बटाना पड़ता था।
बचपन से बड़ा सिंगर बनने के लिए परेशान रहने वाले बृजेश अपने पिता का सहयोग न मिलने पर भी काफी निराश हो गए थे लेकिन भाग्य मे बनना है तो कोई रोक नहीं सकता उसके लिए कोई न कोई सहयोग मिल ही जाता है वही मामाजी जगन्नाथ द्विवेदी गोरखपुर में इंटर कॉलेज में क्लर्क की नौकरी करते थे उन्होंने प्रतिभा को पहचाना और अपनी सीमित कमाई में थोड़ा खर्च किया जिससे प्रतिभा में और निखार आ गया सिगरों की दुनिया में एक नाम बड़े ही सम्मान जनक से लिया जाता है बृजेश आज भी गांव में अपना संबंध बनाए रखे हैं उनका परिवार लखनऊ का गांव दोनों जगह पर रहता है बृजेश कुमार बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं उन्हें उन्हेंफुटबाल खेलना कबड्डी खेलना व एक्सरसाइज करना अच्छा लगता है बच्चों को कुस्ती लडाना व लडनाभी शौक है उनकी आदत है कि खाना बनाना और दोस्तों को खिलाना अपने आवाज का जादू गोलमाल4.मुस्किल अपना मिलन प्रीये मुक्केबाज.भूमी.जयहो.अादि है।

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