लखनऊ। उ.प्र. में गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी हो गयी है। सर्वेक्षण के समय अपने गन्ना क्षेत्रफल के संबंध में किसान को निर्धारित प्रारूप पर घोषणा पत्र भरकर देना होगा और मौके पर मौजूद भी रहना होगा। घोषणा पत्र नहीं भरने पर किसान का सट्टा संचालित नहीं होगा और गन्ना आपूर्ति की सुविधा भी अनुमन्य नहीं होगी। यह भी अनिवार्य किया गया है कि घोषणा पत्र के साथ अपनी पहचान के लिए कृषक को आधार कार्ड देना होगा, आधार कार्ड न होने पर मतदाता पहचान पत्र/ड्राइविंग लाईसेन्स अथवा बैंक पासबुक भी मान्य होंगे।
गन्ना एवं चीनी आयुक्त संजय आर. भूसरेड्डी ने बताया कि गन्ना कृषक सर्वेक्षण के समय स्वतः प्रमाणित खतौनी की प्रति विभागीय सर्वे कर्मी के समक्ष अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करेंगें। गन्ना कृषक नयी/वारिस सदस्यता एवं उपज बढ़ोत्तरी हेतु भी सर्वेक्षण के समय ही आवेदन कर सकेंगें। इसके लिये सर्वेक्षण के दौरान ग्राम स्तरीय गोष्ठियों का सघन आयोजन भी कराया जा रहा है। नये समिति सदस्य बनने के लिए कृषक को तीन प्रतियों में पासपोर्ट साइज की फोटो, भू-अभिलेख(खतौनी की प्रति) एवं बैंक खाता नम्बर देना होगा।
गन्ना आयुक्त ने बताया कि किसानों के व्यापक हित में यह व्यवस्था कराई गई है कि गन्ना विकास परिषद के प्राधिकारी ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक टीमवार, तिथिवार, ग्रामवार गन्ना सर्वेक्षण कार्यक्रम का लीफलेट, पैम्पलेट, स्थानीय समाचार पत्रों के माध्यम से व्यापक प्रचार सुनिश्चित करेंगें तथा एस.एम.एस. से किसानों को इसकी ससमय सूचना देना भी सुनिश्चित करेंगें। इस बार सर्वेक्षण प्रभारी का नाम एवं मोबाइल नम्बर चीनी मिल के वेबसाइट पर भी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जायेगा।
आयुक्त ने बताया कि सर्वेक्षण को लेकर किसी किसान को कोई भी समस्या हो तो वह विभागीय टोल फ्री नं0 1800-121-3203 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।


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