अन्तर्राष्ट्रीय उपचारिका (नर्सेस) दिवस
लखनऊ। अन्तर्राष्ट्रीय उपचारिका (नर्सेस) दिवस विवेकानंद पालीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान में 12 मई 2018 दिन शनिवार को बडे़ भव्य एवं आर्कषक तरीके से मनाया गया। जिसका विषय था *”नर्सेस : नेतृत्व करने की एक आवाज। स्वास्थ्य मानव अधिकार है”।* इस दिवस को मनाने के पीछे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह है कि नर्सेस जो प्रत्येक दिन भर्ती मरीजों की जान बचाने व सेवा करने के लिए हर समय प्रयास करती है। उनके इस प्रयास को सम्पूर्ण विश्व सम्मान दे रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के सचिव श्रीमत् स्वामी मुक्तिनाथानंद जी महाराज द्वारा दीप प्रज्जवलन व वैदिक मंगलाचरण के साथ हुआ। तत्पश्चात संस्थान की उपचारिकाओं व प्रशिक्षु उपचारिकाओं ने मंगल गीत गाएं। इस अवसर पर संस्थान के सचिव श्रीमत् स्वामी मुक्तिनाथानंद जी महाराज, नर्सिग एडमिनिसट्रेटर शान्तीमई जी, मैट्रन मैरी सिंह, प्रवक्ता सुश्री मिसबाह इजहार सिद्दीकी एवं संस्थान के शिक्षिकाओं समेत उपचारिकायें एवं प्रशिक्षु उचारिकायें मौजूद थी।
इन्टरनेशनल काउन्सिल ऑफ नर्सेस स्वास्थ्य मानव अधिकार है पर जोर दे रही हैं और यह भी सोच रही हैं कि नर्सेस को इस योग्य समझदार बनाये कि वे अपने व्यवसाय के मूल आधार को समझ सके, चाहे वह स्वास्थ्य प्रोत्साहन, बीमारी, आघात से बचाव या तीव्र या पुरानी बीमारी हो। नर्सेस किसी भी संस्थान की हृदय होती है। इस वर्ष इन्टरनेशनल काउन्सिल ऑफ नर्सेस ने “नर्सेस : नेतृत्व करने की एक आवाज। स्वास्थ्य मानव अधिकार है” प्रसंग चुना है।
इस अवसर पर संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने उपस्थित नर्सो को सम्बोधित करते हुए कहा कि नर्सेस किसी भी संस्था की रीढ़रज्जू होती है जो मरीजों को उनके बीमारी से लड़ने में ताकत प्रदान करती है तथा हरकदम सहयोग देती है। नर्स एक फरिश्ते के समान होती है। वे नवजात बच्चे के जन्म के समय उसकी ऑखें खोलने एवं मरे हुए व्यक्ति की सौम्यता से ऑख बन्द करने की भी साक्षी होती हैं। उन्हें आवश्यकता है सर्वश्रेष्ठ आर्शीवाद की, क्योंकि एकमात्र वहीं है जो जीवन की शुरूआत एवं खत्म होने की गवाह होती है।

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