पडरौना,कुशीनगर। भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति के समर्थन में लाये गए अध्यादेश की खिलाफत देश मे थमने का नाम नहीं ले रही है। एससी एसटी एक्ट के विरोध प्रदर्शन के अंतर्गत बुद्धवार को कुशीनगर जनपद के सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपा।
ज्ञापन सौंपने से पूर्व बार एसोसिएशन के अधिवक्ता भारी संख्या में जिलाधिकारी कार्यालय पर इकट्ठा हुए और भारत सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे, उनकी मांग थी कि एससी एसटी एक्ट को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि इससे देश का एक बड़ा तबका प्रभावित हो रहा है।
अधिवक्ताओं का कहना था कि भारत सरकार सिर्फ वोटबैंक की राजनीति कर रही है जिसके कारण यह अध्यादेश समाज एक वर्ग को खुश करने की नीयत से लाया गया है। राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने लिखा था कि देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में दी गयी वर्ण व्यवस्था के खिलाफ देश की संसद में एक विधेयक प्रस्तुत किया गया है जिससे कि देश के बहुसंख्यक नागरिकों के मूलाधिकारों का हनन हो रहा है, अतः इसे वापस लिया जाना चाहिए। ज्ञापन में यह भी लिखा था कि अगर यह विधेयक वापस नहीं लिया जाता है तो इससे देश मे अशांति पैदा होने की प्रबल संभावना है।
बार एसोसिएशन ने बुधवार 8 अगस्त के दिन को विरोध दिवस के रूप में आयोजित कर सरकार का विरोध किया, तथा राष्ट्रपति महोदय से यह मांग करी की इस विधेयक को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाये। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कुशीनगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रसिद्ध नारायण दीक्षित, पूर्व अध्यक्ष महंथ गोपाल दाश महामंत्री जन्मेजय कुमार त्रिपाठी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय कुमार शाही, अधिवक्तागण धनन्जय त्रिपाठी, रमेश जायसवाल, राकेश कुमार मिश्र, अश्विनी श्रीवास्तव, संदीप मणि त्रिपाठी, राकेश कुमार त्रिपाठी, शशिभूषण दीक्षित, हृषिकेश द्विवेदी, निर्मल साहा, विजय प्रकाश मिश्र, नाजमा खातून, पंकज तिवारी, प्रदीप कुमार दीक्षित, सुनील सिंह, सुनील मिश्र, जेएन सिंह, जेपी सिंह, शमशुल हक अब्दुल सत्तार आदि अधिवक्तागण उपस्थित रहे।


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