Published at :9th August, 2018, 8:45 PM
>> बालिका गृह का लगातार किया जाता था निरीक्षण ,फिर क्यों छुपाई गयी बातें ,या सबकुछ था ठीक
>> हाईकोर्ट ,जिलाधिकारी और समाज कल्याण विभाग में भेजी जाती थी रिपोर्ट ,या फिर सेवा संकल्प , संस्थान लगा रहीं गलत आरोप
>> संस्था की सचिव ने बीते 1 जून 2018 को सीनियर एसपी मुजफ्फरपुर के नाम दिया था पत्र
रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं ) । मुजफ्फरपुर महापाप मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ,कोर्ट पेशी के लिए आया तो अपने को चिल्ला -चिल्ला कर पाक-साफ कहने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भले ही मुंह पर कालिख पोत दिया हो। ब्रजेश ठाकुर बोल रहा था की बालिका गृह का निरीक्षण मुजफ्फरपुर एवं हाजीपुर के जज ने एक दो बार नहीं बल्कि 60 बार किया हैं ।गाइड लाइन के अनुसार बिंदुवार जांच किया ।आवश्यक सुझाव एवं परामर्श देते रहे और रिपोर्ट हाईकोर्ट तक भेजा गया । जबकि किसी जज ने महापाप की बातें नहीं उठाया । अगर ऐसा कुछ होता रहता तो क्या हमें छोड़ते।
ब्रजेश ठाकुर के संस्था की सचिव बीते 1 जूझ 2018 को वरीय पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरपुर के नाम पत्र भेजा और बिंदुवार स्पष्ट करते कहां की विगत 5 वर्षों में राज्य बाल संरक्षण इकाई द्वारा 20 बार, युनिसेफ द्वारा 8-9 बार, स्थानीय जिलाधिकारी द्वारा 2-3 बार, एवं इनका सात सदस्य टीम प्रति तीन माह पर निरीक्षण कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को देते रहें हैं । यहीं नहीं महिला आयोग की अध्यक्ष ,सदस्य ने भी बालिका गृह का निरीक्षण किया । जबकि किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं पकड़ी गयी । इन सारी बातें में कितनी सच्चाई हैं इसका तो दावा नहीं किया जा सकता ।
सवाल यह उठता हैं की इतने सारे निरीक्षणकर्ता तो चुप नहीं रह सकते थे। क्या यह महापाप एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही दिन पहले शुरू हुआ था की किसी की निगाहें नहीं गयी । सीबीआई क्या उन सभी निरीक्षणकर्ता से पूछताछ करेंगी और यह जानने का प्रयास करेंगी की आपने जब निरीक्षण किया तो सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था। 




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