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Thursday, 9 August 2018

ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा व एससी-एसटी एक्ट की बहाली झूठा छलावा : सावित्री बाई फूले

लखनऊ। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने पर ओबीसी के लोग खुश हो रहे हैं। ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देना व एससी/एसटी एक्ट की पुनर्बहाली झूठा छलावा है। जब तक ओबीसी आरक्षण व एससी/एसटी एक्ट को संविधान की नवी अनुसूची में शामिल नहीं किया जाता तब तक इसका कोई मतलब नहीं है। यह बात आज बहराइच की सांसद साध्वी सावित्री बाई फूले ने कही। वह गुरूवार को अन्तर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर राष्ट्रीय निषाद संघ एवं अखिल भारतवर्षीय गोड महासभा द्वारा कैपिटल सेन्टर में आयोजित सामाजिक न्याय एवं अधिकार सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुई थी।
सांसद ने कहा कि सरकार द्वारा बड़ी सफाई से ओबीसी व एससी आरक्षण पर चोट की जा रही है। उन्होंन कहा कि एससी, एसटी एक्ट को बहाल करने के लिए 02 अप्रैल का दलित आंदोलन रहा। संविधान व आरक्षण की रक्षा के लिए ओबीसी, एससी व एसटी को एकजुट होकर आंदोलन करना पड़ेगा।
साध्वी फूले ने कहा कि भारतीय संविधान लागू होने से पहले बहुजनों को गले में हाड़ी व कमर में घंटी बांध कर चलना पड़ता था। लेकिन बाबा साहब अम्बेडकर का संविधान लागू हुआ तो पिछड़े दलित गले में टाई व कमर में बेल्ट व रिवाल्वर बांध कर चल रहा है। उन्होने बहुजन समाज से आरक्षण व सामाजिक न्याय के लिए संगठित होकर आंदोलन तेज करना होगा।
उन्होंने कहा कि संविधान की देन है कि पिछड़े दलित डॉक्टर, इंजीनियर, प्रधान, प्रमुख, शिक्षक व अधिकारी कमचारी बन रहें हैं। पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण मिला है लेकिन इनका प्रतिनिधित्व अभी 06 प्रतिशत ही है। ओबीसी को भी लोक सभा व विधान सभा में आरक्षण मिलना चाहिए। वर्तमान समय में भी बहुजन समाज के दुल्हो को घोड़ी पर चढने से रोका जा रहा है।

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