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Sunday, 2 September 2018

बॉक्सिंग ग्लव्स खरीदने के लिए पैसे नहीं थे, अब देश के लिये गोल्ड हासिल किया


चंडीगढ़। हार न मानने वाले अमित ने शनिवार को एशियाई खेलों में गोल्ड जीतकर यह साबित भी कर दिया। गोल्ड जीतने के बाद अमित के भाई अजय पंघल उनके संघर्ष को याद करते हुए बताते हैं कि जब इस किसान परिवार के आर्थिक हालात अच्छे नहीं थे, तब अमित बिना बॉक्सिंग ग्लव्स के ही अपनी ट्रेनिंग किया करते थे।

हरियाणा के रोहतक जिले के मैना गांव में रहने वाले अमित के पिता, विजेंदर सिंह एक साधारण किसान हैं, जो अपनी एक एकड़ की जमीन पर गेहूं और बाजरे की खेती करते हैं। परिवार की आर्थिक हालत कभी बहुत अच्छी नहीं रही। इसके चलते अमित के बड़े भाई अजय पंघल ने बॉक्सिंग छोड़ दी थी। अमित के बड़े भाई अजय आज सेना में है।

उन्होंने बताया, 2011 तक हमारे परिवार के आर्थिक हालात अच्छे नहीं थे। हमें खेती में काफी नुकसान हुआ था जिसकी वजह से आमदनी ज्यादा नहीं हुई थी। मैं उस समय बॉक्सिंग करता था और अनिल धांकर मेरे कोच हुआ करते थे। मेरा सपना अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर बनने का था लेकिन पारिवारिक हालातों के चलते मैनें बॉक्सिंग छोड़ दी और 2011 में आर्मी में नायब के पद पर भर्ती हो गया ताकी घर चल सके। आर्मी में रहते हुए भी मैंने यह सुनिश्चित किया कि अमित की बॉक्सिंग नहीं छूटे क्योंकि मुझे भरोसा था कि जो काम मैं नहीं कर पाया वो मेरा छोटा भाई जरूर कर सकता है।

अजय अपना पुराना वक्त याद करते हुए बताते हैं, ‘बॉक्सिंग के लिए अमित का जूनून ऐसा था कि उन्होंने बिना बॉक्सिंग ग्लव्स के 6 महीने तक ट्रेनिंग की थी। उनके बॉक्सिंग ग्लव्स जगह-जगह से तार-तार हो गए थे और नए ग्लव्स खरीदने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। एक समय ऐसा भी था जब अमित के पास बॉक्सिंग ग्लव्स खरीदने के लिए पैसे नहीं थे और उन्होंने 6 महीने से भी ज्यादा समय तक बिना ग्लव्स के ट्रेनिंग की। लेकिन उसने हार नहीं मानी। एक बॉक्सर के लिए सही डाइट बहुत जरूरी होती है अजय को यह भी पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हुई।’

इन सभी चुनौतियों के बावजूद अमित ने अपनी जी-तोड़ मेहनत और बुलंद हौंसले के दम पर बड़े-बड़े बॉक्सर को मात देकर गोल्ड हासिल किया। कई बार तो अमित ने खाली पेट भी ट्रेनिंग की है और जीत हासिल की है।

अमित भारतीय सेना में जेसीओ हैं और नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं। उन्होंने 2006 में बॉक्सिंग करना शुरू किया था। अमित के पिता विजेन्दर सिंह ने कहा, ‘हमारे परिवार ने ओलिंपिक मेडल के लिए काफी त्याग किया है। आज जो मेडल उसने पाया है उससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा लेकिन हम सभी का सपना है कि वह ओलिंपिक में गोल्ड हासिल कर देश का नाम ऊंचा करे।’

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