सुल्तानपुर—– जिला चिकित्सालय जहाँ सरकार का दावा है कि निः शुल्क दवाइयां मिलेगी, मरीजो को खून टेस्ट से लेकर वह सारी सुबिधाये मुहैया होगी जिसकी जरुरत मरीजो को होगी लेकिन सच्चाई तो यह है कि सरकार ने सारी व्यवस्थाओं के लिये बड़े पैमाने पर धनराशि खर्च कर रही है लेकिन कुर्सी पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी अपने दायित्वों व् कर्त्यवो से भटक चुके जिसका खामियाजा उन गरीब मरीजो के तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है जिनकी माली हालत बिलकुल दयनीय हैजिला चिकित्सालय का है यह हाल—-
1- डॉक्टर द्वारा हॉस्पिटल से दवा न लिखकर मरीजो को कमीशन के चक्कर में प्राइवेट दवाइयां लिखी जाती है।
2 जांच सुबिधाये होने के बाद भी प्राइवेट जांच लिखी जाती है
3- मरीजो को फल , दूध, भोजन सिर्फ हॉस्पिटल के कागजो में चल रहा है
4- सरकार के सख्त रवैये के बाउजूद भी कई डॉक्टर अपने आवास पर प्राइवेट फीस के साथ मरीजो को देखते है
5- हॉस्पिटल के कर्मचारी अपने कार्यो का निर्वहन नही करते मरीजो के रजिस्ट्रेशन पर्ची काउंटर समय से पूर्व ही बंद कर दिए जाते हे
6– आई ओ पी डी कछ में टेस्ट किये गए मरीजो के चश्मे को प्राइवेट बनवाने के लिये पूरी व्यवस्था तैयार की गई है।
क्या है मामला—-
कहा गया है कि जब घर का मुखिया सही होता है तो घर के सारे सदस्य भी सही रहते है लेकिन जब मुखिया में खोट होता है तो उसी का फायदा परिवार के सदस्य भी उठाते है यहाँ भी यह माना जाये तो कोई गलतं नही होगा यह भ्रस्टाचार जैसा शब्द हमारे लिये नासूर बन गया है इसी शब्द को वह सभी लोग यूज कर रहे जो जिम्मेदार कुर्सी पर बैठे हुए है यही कारण है कि उक्त सारी सुबिधाओं से वह सभी वंचित है जिनके लिये सरकार हर माह करोड़ो रूपये खर्च कर रही है।

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