पिहानी/हरदोई।कस्बे में कोटेदार अनीता वर्मा के भतीजे अमित उर्फ़ रिंकू पुत्र महेश और साइकिल व्यवसायी साजिद खाँ पुत्र मेहंदी अली के बीच बीते शुक्रवार 8 जनवरी को हुई मारपीट की घटना में कोतवाली पिहानी में दर्ज शिकायत पर अलग-अलग पहलुओं से दोनों पक्षों की रिपोर्ट पर कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए आज पुलिस क्षेत्राधिकारी हरियांवा शैलेन्द्र सिंह राठौर व कस्बा प्रभारी अनिल सक्सेना के साथ हमराही पुलिस आरक्षी परवेज खाँ दोपहर समय करीब 1:00 बजे घटनास्थल पर जाँच करने पहुंचे।दोनों ही पक्षों की तहरीरी बिन्दुओं में दर्शाए गए आरोपों के आधार पर घटनाक्रम के घटनास्थल और घटना का समय ध्यान में रखते हुए पूर्ण निष्पक्षता से जांच करते हुए सीओ हरियांवा ने मार्केट में घूम-घूम कर साजिद साइकिल की दुकान के आस-पास तकरीबन सभी दुकानों के दुकानदारों से जानकारी जुटाई।मगर तहकीकात के दौरान सीओ हरियांवा को ऐसा कोई भी व्यक्ति या दुकानदार नहीं दिखा या मिला जोकि उक्त घटनाक्रम में साजिद साइकिल की दुकान पर शुक्रवार को हुए मारपीट के प्रकरण पर चश्मदीद गवाह बनकर शिकायती तथ्यों व साक्ष्यों को सही ठहराता।फिलहाल कई दुकानदारों ने सरकारी राशन की दुकान पर हुई वारदात की सुनी हुई जानकारी होना स्वीकार किया मगर शुक्रवार की मार्केट बंदी होने के कारण अधिकांश दुकानदारों ने दुकान खोली नहीं कहकर ब्यान टाल दिया तो कई ने आवश्यक कार्य या सौदागरी की नियत से सहायक भाई-भतीजे को दुकान पर जिम्मेदार बैठाकर उस दिन दुकान पर न होने की बात सुनाकर बयान गवाही से दामन बचा लिया।फिलहाल सीओ हरियांवा ने दौरान विवेचना इस बात की संदिग्धता दर्शाई है कि ऐसा प्रतीत होता है कि शुक्रवार मार्केट बंदी के दिन साइकिल की दुकान का खुलना और दुकान मालिकान के सभी लोगों का घटना में मौजूद होना कहीं अपराधियों ने अपराध पर पर्दा डालने की नियत से सोंची समझी साजिश का षड़यंत्र रचकर झूठ और फरेब की चाल से रिपोर्ट दर्ज करा दी है।तहकीकात के पहलुओं से कोटेदार परिवार पर लगे आरोप सिद्ध नहीं हो सके।चलते-चलते सीओ हरियांवा से विवेचना की पुष्टि पर संवाददाता द्वारा किए गए सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि विवेचना के पहलुओं का खुलासा करना अभी मेरे लिए नियम विरुद्ध है।बस इतना कहूँगा कि सच्चाई कभी छिपती नहीं।हकीकत में पीड़ित पक्ष को न्याय मिलेगा।उनका यह इशारा यह ब्यान कर रहा था कि स्थलीय निरीक्षण में जो वास्तविकता सामने आई है उससे मारपीट की वारदात पर कहाँ,कब और क्यूँ में उलझी सवालों की गुत्थियों का जवाब उन्हें आईने में साफ झलकती तस्वीर की भाँति मिल गया है।कोटेदार पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को इस तहकीकात से बल मिला है।सीओ हरियांवा का कहना है कि सरकारी गल्ले की दुकान पर सरकारी अभिलेख फाड़कर किए गए तांडव में महिला कोटेदार से अभद्रता व उसके सहायक भतीजे से मारपीट उत्पीड़न और दलित उत्पीड़न (एस۔सी۔एस۔टी) का प्रकरण है जिसमें दोषी आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।

No comments:
Post a Comment