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Thursday, 11 April 2019

भारत में 3 करोड़ अस्थमा एवं 3 करोड़ सी.ओ.पी.डी. के मरीज—डॉ सूर्यकांत

यह प्रतिभागी  रोगियों की जांच में होगें  लाभदायक

लखनऊ। इंडियन चेस्ट सोसाइटी द्वारा पी.एफ.टी प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजन केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसन में किया गया । प्रोफेसर सूर्यकांत के मुताबिक पिछले दस वर्षो से देश के दस केन्द्रों पर पी.एफ.टी.प्रशिक्षण कराया जा रहा है,जिसमें रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग केजीएमयू उनमें से एक है।पी.एफ.टी. जांच से सांस की बीमारियों का प्रारम्भिक अवस्था में पता लगाया जाता है। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को फेफड़ों की संरचना,कार्यविधि एवं कार्य क्षमता इत्यादि के विषय में बताया गया।

पी. एफ. टी. कार्यशाला का हुआ समापन

साथ ही साथ पी.एफ.टी. मशीन के द्वारा रोगियों की  जांच कैसे की जाती है, इसका भी पूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इंडियन चेस्ट सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष प्रो सूर्यकान्त ने बतायाकि भारत में लगभग 3 करोड़ अस्थमा एवं 3 करोड़ सी.ओ.पी.डी. के मरीज है, जिनमेें से आधे से ज्यादा सांस के मरीजों की प्रमाणिक जाॅच नहीं हो पाती है।पी.एफ.टी के द्वारा फेफडे़ के कारण होने वाले समस्त सांस के रोग जैसे सी.ओ.पी.डी., अस्थमा, ब्रोनकाइटिस, इंटेसटिटियल लंग डिजीजेस (आई.एल.डी) इत्यादि बीमारियों की तीव्रता का मापन करके इनका निदान किया जाता है।इंडियन कालेज आफ एलर्जी, अस्थमा एण्ड एप्लाइड इम्यूनोलोजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष,प्रो सूर्यकान्त ने कहाकि विभिन्न प्रदेशों से आये हुए प्रतिभागी जब यहाॅ से प्रशिक्षण लेकर जायेगें तो हमारे समाज के सांस के रोगियों की जांच में लाभदायक सिद्ध होगें।

यह रहें उपस्थित
समापन समारोह में डॉ सूर्यकान्त ने सभी प्रतिभागियों को सेर्टिफिकेट प्रदान करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की इस कार्यशाला में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रो एस.के.वर्मा, प्रो राजीव गर्ग, प्रो संतोष कुमार,डॉ अजय वर्मा, डॉ आनंद श्रीवास्तव और डॉ दर्षन बजाज, डॉ ज्योति बाजपेयी, डॉ मनोज पाण्डेय, पी.एफ.टी. लैब के इंचार्ज सुनील मौर्या तथा उनकी टीम और शोध छात्र अनुज पाण्डेय उपस्थित रहे।

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