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Saturday, 13 April 2019

बढ़ा आजमगढ़ का राजनीतिक तापमान

पूर्वांचल में पिता मुलायम की राजनीतिक विरासत को बढ़ाने में लगे अखिलेश

भोजपुरिया वाद-संवाद के जरिये लोगों को लुभाने में लगे निरहुआ

लखनऊ। यूपी के पूर्वांचल का एक अहम संसदीय क्षेत्र है आजमगढ़। यह देश-प्रदेश के राजनीतिक मानचित्र पर तब काफी सुर्खियों में छाया जब यहां से 2014 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने चुनाव लड़ा और विजयी भी हुए। अब 2019 के लोकसभा चुनाव का आगाज हो चुका है और बदलते राजनीतिक परिदृश्य में यहां का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। मुलायम के पुत्र व वर्तमान में सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने पिता की पूर्वांचल में इस क्षेत्रीय राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए अबकी बार आजमगढ़ से स्वयं चुनावी ताल ठोंक रहे हैं। उनके खिलाफ बीजेपी ने भोजपुरी फिल्मों के स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को मैदान में उतारा है। वहीं मुलायम से पूर्व 2009, 2004 और 1999 के लोस चुनाव में क्रमश: बीजेपी, बीएसपी व फिर सपा के टिकट पर यहां से सांसद रहे रमाकांत यादव ने अब कांग्रेस का दामन थाम लिया है। यानि अभी तक आजमगढ़ का जो राजनीतिक फोकस केवल मुलायम-अखिलेश के इर्दगिर्द ही घूमता नजर आ रहा था, उसमें कुछ और स्थानीय व मजबूत प्रतिद्वंद्वियों की इंट्री होती दिख रही है। आजमगढ़ लोकसभा में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें गोपालपुर, सगरी, मुबारकपुर, आजमगढ़ और मेहनगर सीट शामिल है जिसमें से वर्तमान में तीन विस सीटों पर सपा तो दो पर बसपा प्रत्याशी का कब्जा है।

जानकारों की मानें तो रमाकांत आजमगढ़ क्षेत्र में एक दबंग छवि वाले नेता के तौर पर जाने जाते हैं और उनकी जमीनी पकड़ भी वहां पर अन्य किसी भी क्षेत्रीय नेताओं से कहीं अधिक है। हालांकि जिस इरादे से रमाकांत कांग्रेस में आये हैं कि उन्हें आजमगढ़ से टिकट मिल सकता है तो फिलहाल इसकी उम्मीद कम ही दिख रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिस प्रकार सपा-बसपा गठबंधन ने सोनिया-राहुल गांधी समेत उसकी कुछ प्रमुख सीटों पर अपने प्रत्याशी नहीं उतारने का ऐलान किया है तो जवाब में कांग्रेस ने भी उनकी कुछ प्रमुख सीटों को छोड़ने की घोषणा की है। अब जबकि आजमगढ़ से खुद अखिलेश खडे हैं तो कांगेस रमाकांत यादव को तो यहां से चुनावी दंगल में उतारने से रही। बहरहाल, बीजेपी से अलग होकर अब कांग्रेसी पंजा पकड़ने वाले रमाकांत की भूमिका आजमगढ़ के चुनावी समर में परोक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रहेगी। वैसे देखा जाये तो निरहुआ का राजनीतिक कद अखिलेश यादव के सामने उसी तरह है जैसे हाथी के सामने चींटी। लेकिन जैसा कि कहा जाता है कि राजनीति, जंग और क्रिकेट में आखिरी समय तक नतीजे अप्रत्याशित और अचंभित करने वाले हो सकते हैं। निरहुआ की बात करें तो वो आजमगढ़ से सटे गाजीपुर के मूल निवासी हैं और भोजपुरिया गीत-संगीत और फिल्म के जरिये दर्शकों के लाडले बनें। आजमगढ़ से निरहुआ का कोई खास वास्ता नहीं है, मगर अभी चुनावी जनसंपर्क के दौरान उनका भोजपुरिया वाद-संवाद वाला स्टाइल खासकर वहां के युवाओं को काफी लुभा रहा है। हालांकि आगे युवाओं का उनके प्रति यह लुभावनापन किस कदर वोट में तब्दील होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।

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