लखनऊ। भले ही शहर की हाईटेक पुलिस अपराध रोकने मेंफेल साबित हो रही हो लेकिन क्राइम ग्राफ नियंत्रण में फेल एसएसपी कलानिधि नैथानी ने लोकसभा चुनाव- 2019 के भयमुक्त/निष्पक्ष वातावरण में सकुशल संपन्न होने पर चुनाव में लगे पूरे पुलिस फ़ोर्स की प्रशंसा कर महत्वपूर्ण योगदान देने वाले 237 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
एसएसपी ने अपनी तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव-2019 को सकुशल सम्पन्न करना पुलिस फोर्स के लिए एक बेहद चुनौती पूर्ण था, चुनाव को भयमुक्त/निष्पक्ष व शान्ति पूर्ण माहौल में सकुशल संपन्न कराने को लेकर उन्होने चुनाव के दौरान बरते जाने वाली विभिन्न प्रकार की सावधानियों की रूपरेखा स्वयं तैयार की गई थी। जिसके संबंध में समय-समय पर पुलिस फोर्स की ब्रीफिंग की गई थी साथ ही उन्हें एक बेहतर पुलिसिंग का परिचय देते हुए लोकसभा चुनाव-2019 को भयमुक्त/पारदर्शी रूप से सम्पन्न कराने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।
जिसके अनुपालन में जनपद लखनऊ की पुलिस फोर्स ने आदर्श चुनाव आचार संहिता लगते ही अभियान चलाकर विभिन्न पार्टियों के लगे पोस्टर-बैनर, वाहनों पर लगे पार्टियों के झण्डे, वाहनों में लगी काली फ़िल्म, आबकारी अधि. से संबंधित निरोधात्मक कार्यवाही की गई साथ ही जनपद के सभी थानों में शातिर किस्म के अपराधियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ निरोधात्मक कार्यवाही की तथा कई शातिर अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोली।
एसएसपी ने बताया कि लखनऊ की पुलिस फोर्स ने न केवल जनपद लखनऊ के लोक सभा चुनाव-2019 में अपना मत्वपूर्ण योगदान दिया बल्कि विभिन्न चरणों मे विभिन्न जिलों में जाकर अनुशासित रहकर लोकसभा चुनाव-2019 को सकुशल सम्पन्न कराया। जिसकी प्रसंशा वहाँ के उच्च अधिकारियों द्वारा की गई।
एसएसपी ने पुलिस फोर्स का चुनाव में अनुशासित रहकर पूरे समर्पित भाव से लोकतंत्र के महापर्व लोक सभा चुनाव-2019 को भयमुक्त/पारदर्शी वातावरण में सकुशल सम्पन्न कराने में मत्वपूर्ण योगदान देने वाले 237 पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी प्रशंसा की तथा उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
खुद की वाहवाही के लिए बरसाती मेढ़क की तरह पुलिस करने लगती है काम
गौरतलब है कि जब लोकसभा या विधानसभा चुनाव आता है तो पुलिस अपनी वाहवाही के लिए पता नहीं कहां कहाँ से अवैध असलहा की फैक्ट्री और अवैध शराब की भट्ठियां, शराब की तस्करी और पता नहीं क्या क्या खुलासे करके अधिकारियों की नजरों में अपने नंबर बढ़वाने के लिए सुर्खियां बटोरती है। लेकिन आचार संहिता खत्म होते ही पुलिस के संरक्षण में फिर से ये धंधे फलने फूलने लगते हैं लेकिन पुलिस फिर पांच साल तक कोई खुलासा करने में नाकाम साबित होती रहती है।

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