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Thursday, 9 May 2019

बेबी शैम्पू है पूरी तरह सुरक्षित, मिले ये तर्क

नई दिल्ली। दुनिया की दिग्गज फार्मास्युटिकल व एफएमसीजी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने कहा है कि उसके उत्पाद बच्चों के इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं।

खासतौर पर बेबी शैम्पू में फॉर्मल्डिहाइड नामक रसायन को लेकर कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह अपने उत्पाद में न तो फॉर्मल्डिहाइड और न ही कोई ऐसा कोई रसायन मिलाती है जिससे फॉर्मल्डिहाइड निकलता हो।

कंपनी ने राजस्थान ड्रग्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन की जांच रिपोर्ट को भी चुनौती दी है। जांच रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद बेबी शैम्पू के नमूनों की जांच अब कोलकाता स्थित सेंट्रल ड्रग लेबोरेटरी में हो रही है।

राजस्थान में जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी शैम्पू के दो बैच की जांच में फॉर्मल्डिहाइड पाए जाने की बात सामने आई थी, जिसके बाद राजस्थान और बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने शैम्पू की बिक्री पर रोक लगा दी। दैनिक जागरण से बातचीत में जॉनसन एंड जॉनसन के प्रवक्ता ने बेबी शैम्पू में फॉर्मेल्डिहाइड होने की संभावना को नकारा है।

कंपनी का कहना है कि ऐसा होना संभव इसलिए नहीं है क्योंकि वह शैम्पू के निर्माण में न तो फॉर्मल्डिहाइड और न ही ऐसे किसी रसायन का इस्तेमाल करती है जिससे इसका रिसाव होता हो।

कंपनी ने सवाल किया कि वह ऐसा करके अपने 125 वर्ष के ग्लोबल बेबीकेयर ब्रांड के साथ खिलवाड़ कैसे कर सकती है।

यह पूछने पर कि क्या कंपनी अपने उत्पादों में फॉर्मल्डिहाइड की जांच करती है, जॉनसन एंड जॉनसन के प्रवक्ता ने स्वीकार किया कि वह इसका परीक्षण करती है।

कंपनी ने कहा कि फॉर्मुलेशन डेवलपमेंट, उत्पाद निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामान के प्रबंधन, क्वालिटी सिस्टम और टेस्टिंग के प्रत्येक स्तर पर जांच से यह सिद्ध हुआ है कि वह बेबी शैम्पू में फॉर्मल्डिहाइड नहीं मिलाती।

कंपनी ने इसकी जानकारी सरकार को भी दी है। कंपनी का कहना है कि वह डीएंडसी अधिनियम और उसके नियमों के तहत निर्धारित सभी मानकों का पालन करती है। उसका दावा है कि उसके उत्पाद इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं।

इस मामले में अब सवाल राजस्थान में हुई जांच के तरीकों पर भी उठने लगे हैं। सूत्र बताते हैं कि राजस्थान की ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी ने नमूनों की मात्रा और जांच के तरीके को भी कंपनी से साझा करने से इन्कार कर दिया है।

लेबोरेटरी ने जांच के बाद केवल अपना निर्णय ही सार्वजनिक किया है। इसी वजह से कंपनी ने जांच के इन नतीजों को चुनौती दी है जिसके चलते अब कोलकाता की सेंट्रल लेबोरेटरी में जांच कराई जा रही है।

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