पूर्वी यूपी का प्रभार है कंधों पर, कुल 27 सीटें हैं
छठें चरण में 14 तो अंतिम सातवें फेज में 13 सीटों पर होगा मतदान
2009 व 2014 लोस चुनावों में कांग्रेस को कुल पांच सीटें ही मिल पार्इं
सुल्तानपुर में प्रतिष्ठा दांव पर, गांधी परिवार की बेटी के सामने छोटी बहू
लखनऊ। लोकसभा चुनाव के पांच चरणों के संपन्न होने के साथ ही अब सभी राजनीतिक दलों का फोकस आखिरी बचे दो फेज के चुनावों पर टिक गया है। यूपी की बात करें तो 12 और 19 मई को होने वाले अंतिम चुनावी दौर में पूर्वांचल की दो दर्जन से अधिक सीटों पर मतदान होना है। ऐसे में बीजेपी, कांग्रेस व सपा-बसपा गठबंधन सहित तमाम क्षेत्रीय दलों ने भी अपनी पूरी ताकत पूर्वांचल की सीटों को लेकर झोंक दी है। मोदी, मायावती से लेकर अखिलेश तक लगातार पूर्वांचल क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। वहीं कांगे्रस की बात करें तो भले ही पार्टी इस क्षेत्र में अपने खोये जनाधार को वापस पाने के लिए जद्दोजहद करने में लगी हुई है, मगर प्रियंका गांधी वाड्रा के ‘पॉलीटिकल कैरियर’ के मद्देनजर पूर्वांचल की सीटें काफी अहम मानी जा रही है। विगत दो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को पूर्वांचल क्षेत्र से कुल मिलाकर पांच सीटें ही मिल पाई थीं। अब जबकि प्रियंका वर्तमान में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव होने के साथ ही पूर्वी यूपी की प्रभारी हैं, ऐसे में उनके कंधों पर पूर्वांचल में बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव है।
सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने के साथ ही प्रियंका को पूर्वांचल में एक तरह से मृतप्राय: हो चुकी कांग्रेस पार्टी को फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी थमा दी गई। अभी चुनाव के दो फेज ही बचे हैं, ऐसे में प्रियंका के लिए असल राजनीतिक अग्निपरीक्षा शुरू हो गई है। इन दोनों चरणों में अब सारी राजनीतिक लड़ाई पूर्वांचल की ही सीटों को लेकर है।
12 मई को छठें चरण के तहत होने वाले चुनाव में पूर्वांचल की 14 सीटों पर तो आखिरी दौर में सातवें चरण के अन्तर्गत 19 मई को इसी क्षेत्र की 13 सीटों पर वोटिंग होगी। ऐसे में इन दोनों फेज के चुनाव में कुल मिलाकर पूर्वांचल की 27 सीटों पर चुनावी जंग होना है। गौर हो कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर की वजह से चुनाव के इन आखिरी फेज में महज एक सीट तो इससे पहले 2009 के लोस चुनाव में महज चार सीटों पर जीत हासिल हुई थी। ऐसे में दो लोकसभा चुनाव के इन दोनों अंतिम चरण में कांग्रेस को पूर्वांचल की पांच सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। उसमें भी गांधी परिवार की बेटी प्रियंका की सबसे बड़ी परीक्षा तो सुल्तानपुर सीट पर होनी है, जहां एक तरफ बीजेपी से इसी परिवार की छोटी बहू मेनका गांधी तो दूसरी ओर कांग्रेस के बडेÞ चेहरों में शुमार डॉ. संजय सिंह चुनावी रण में हैं जो प्रियंका के सहारे एक बार फिर यहां से अपनी चुनावी वैतरणी पार करने में लगे हैं।
‘प्रियंका जब से आर्इं, यूपी के पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त ऊर्जा का संचार हुआ है अगले दोनों फेज अहम हैं। प्रतापगढ़ जीते थे सुल्तानपुर व भदोही में मजूबत कैंडीडेट हैं, बेहतर रिजल्ट की उम्मीद है। ’ – डॉ. अनूप पटेल, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता

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