युवाओं ने धूमधाम से मनाई परशुराम जयंती,युवा हैं संस्कार के रक्षक-पारुल | Alienture हिन्दी

Breaking

Post Top Ad

X

Post Top Ad

Recommended Post Slide Out For Blogger

Tuesday, 7 May 2019

युवाओं ने धूमधाम से मनाई परशुराम जयंती,युवा हैं संस्कार के रक्षक-पारुल

ब्राह्मण जाति नहीं, संस्कार के रक्षक यह युवा बनेंगे संस्कारों के रक्षक व प्रणेता -मधुर मिश्रा

हरदोई 7 मई- संस्कारों की परंपरा को जीवंत करते हुए शहर के श्रीश चंद अग्रवाल बारात घर में युवाओं ने संस्कारों की रक्षा हेतु भगवान परशुराम की जयंती को जिस उत्साह और धूमधाम से मनाया ,लोगों की उपस्थिति यह बताने के लिए काफी थी कि ब्राह्मणों को एकजुट करना इतना ही बड़ा असंभावित कार्य है, जैसे आकाश से तारे तोड़कर लाना। लोगों ने कहा कि यह कार्य युवाओं ने अपने दम पर कर डाला और यह हमारी संस्कृति के रक्षक बनेंगे। स्थानीय बारात घर में युवा मोहन मिश्रा, उत्तम मिश्रा की टीम ने विष्णु जी के छठे अवतार भगवान परशुराम की जयंती को धूमधाम से मनाया और भंडारा भी किया।जयंती में उपस्थित विधायिका श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि यह पहला अवसर है जो युवाओं ने इस तरीके से भगवान परशुराम की जयंती को मनाया है। यह संस्कार अनवरत चलते रहना चाहिए। नगर पालिका अध्यक्ष सुख सागर मिश्र ने कहा कि ब्राह्मण जाति नहीं बल्कि संस्कार है जिन संस्कारों के प्रणेता भगवान परशुराम ने मानव मात्र में जीवंत करने के लिए समाहित किया है, जिसका परिपालन करना चाहिए। जिससे हमारी संस्कृति अक्षुण्य बनी रहे। प्रीतेश दीक्षित ने कहा कि हमें यह चिंतन करने की आवश्यकता है कि हर क्षेत्र में हम बहुसंख्यक थे किंतु धीरे धीरे सभी क्षेत्रों में हमारा पतन होता रहा। इसका प्रमुख कारण इन वर्गों का ब्राह्मणों से विरत हो जाना, जिस प्रकार से गंगा गंगोत्री से निकलकर उसमें विभिन्न नदियां समाहित हो कर शुद्धता का मापन करती चली जाती है। ब्राह्मणों ने उससे ब्रह्म गंगा में समाहित करना छोड़ दिया,जिससे पिछड़े अगड़े का भाव सुदृढ़ होकर पतन की ओर जाता रहा। हमें सब को समाहित कर चलना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता रामदेव अभिनेत्री ने ब्राह्मणों के वर्चस्व और वजूद को ऐतिहासिक दृष्टिकोण से समझाया। उन्होंने कहा कि जब जब ब्राम्हण साथ नहीं रहा, तब तब उसका पतन निश्चित हो गया। समाजसेवी अविनाश मिश्रा ने कहा कि ब्राह्मण सदैव पूजनीय रहा और रहेगा भी, जरूरत है हमें परंपराओं का पालन करने की, जिसमें हमारा वजूद सुरक्षित रह सके। समाजसेवी धनंजय मिश्रा मिश्रा ने कहा कि बिकने और बेचे जाने की परंपरा खत्म होनी चाहिए ,यदि हमें अपने संस्कारों की रक्षा करनी है तो एकजुटता से रहकर बिकने और बेचने की परंपरा बंद करनी होगी। उन्होंने कहा कि युवाओं द्वारा किया गया यह प्रयास अगले वर्ष परशुराम जयंती में वृहत रूप में दिखाई पड़ेगा। समाजसेवी एवं आराध्या फाउंडेशन की ट्रस्टी श्रीमती लीला पाठक ने कहा कि वेद वेदों का ज्ञाता ब्राह्मण अपने संस्कारों से च्युत होकर इस दशा में पहुंचने के लिए हम स्वयं के दोषी हैं हमें उन संस्कारों की रक्षा करनी ही होगी। इसके पूर्व विधायिका रजनी तिवारी ,कमलेश पाठक, विमलेश दीक्षित, पारुल दीक्षित ,मधुर मिश्रा ,धनंजय मिश्रा, मुख्य अतिथि मेजर आशीष चतुर्वेदी व विशिष्ट अतिथि शिवानंद जी, डॉक्टर चित्रा मिश्रा, श्रीमती लीला पाठक, वंदना तिवारी आदि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। शुक्ला ब्रदर्स ने भगवान परशुराम और देश भक्ति के गीत सुनाए।जयंती कार्यक्रम के संयोजक मोहन मिश्रा ने सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। इसके बाद भंडारे में भगवान परशुराम जयंती का प्रसाद लोगों ने ग्रहण किया।

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad