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Thursday, 9 May 2019

बिना पंजीकरण के स्वान प्रजनन अवैधानिक : डॉ. शिवानंद काशी

रिपोर्ट:डॉ. आर. बी. चौधरी
(पूर्व मीडिया प्रमुख एवं प्रधान संपादक-भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड,भारत सरकार)

रांची (झारखंड)। स्वानों प्रजनन से संबंधित नियम “पशु क्रूरता निवारण (स्वान पशु नियंत्रण एवं व्यापार ) नियम, 2017” इस समय खूब चर्चा में है.इस नियम में निर्देशित सभी निर्देशों के प्रति पालन करने पर कई स्वान अपराध रोके जा सकते हैं जिससे पशु प्रेमियों को काफी राहत मिलने की आशा जग गई है। यह बता दें कि देश भर के तमाम पशु प्रेमियों और संस्थाओं के शिकायत पर उच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि पशुओं को बेचने वाले सभी केंद्रों के लिए उन्हें राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्डो से पंजीकरण कराना होगा।उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार झारखंड जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने रांची में एक निरीक्षण अभियान चलाया जिसके तहत कई स्वान प्रजनन केंद्रों की जांच की गई और गलती से बचने के लिए हिदायत दी गई।

जांच समिति के प्रमुख एवं झारखंड जीव जंतु कल्याण बोर्ड प्रभारी अधिकारी डॉ. शिवानंद काशी के अनुसार नियमानुसार एवं सुनियोजित ढंग से राज्य में पहली बार स्वान प्रजनन केंद्रों की जांच-पड़ताल किया गया।इस जांच मैं शामिल सभी अधिकारियों ने स्वानों के प्रजनन केंद्रों पर दौरान उनके रखर-खाव एवं स्वानों ऊपर किए जाने वाले बर्ताव का जानकारी ली । साथ ही साथ प्रजनन केंद्रों को हिदायत दी कि झारखंड राज्य पशु कल्याण बोर्ड के बिना पंजीकरण कराए स्वान प्रजनन कराना करना अपराध है। अगर ऐसा किसी के द्वारा किया जाता है तो उसके ऊपर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी जिसमें जुर्माने के साथ- साथ जेल का भी प्रावधान है। उन्होंने यह भी बताया कि “पशु क्रूरता निवारण (स्वान पशु नियंत्रण एवं व्यापार ) नियम, 2017 का भली प्रकार परिपालन करना होगा। इस नियम के अनुसार स्वान प्रजनन केंद्र के पंजीकरण का शुल्क 5,000 रुपए रखा गया है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए झारखंड राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड से संपर्क किया जा सकता है।

डॉ. काशी ने बताया कि अवैधानिक स्वान प्रजनन में संलिप्त लोगों ऊपर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिक्री के दौरान पकड़े गए जननकर्ता के स्वान (पशु) को जप्त कर लिया जाएगा और नियमानुसार अंतिम निर्णय आने तक की अवधि के दौरान स्वान (पशु) के भरण -पोषण एवं स्वास्थ्य पर किए सभी खर्च उसी जननकर्ता को भरना पड़ेगा। इस मामलों की पूरी निगरानी झारखंड राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड करेगा। डॉ. काशी ने यह भी बताया कि नियमानुसार कोई भी पशु प्रजननकर्ता डेढ़ वर्ष से कम और 8 वर्ष से अधिक आयु के मादा स्वान से साल में सिर्फ एक बार प्रजनन करा सकता है। इस प्रकार एक मादा पशु के जीवन काल में अधिकतम 5 बार बच्चा लिया जा सकता है।झारखंड राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड की ओर से डॉ शिवानंद ने निरीक्षण समिति के सदस्य डॉ. दयानंद प्रसाद, डॉ.स्टेनली एवं डॉ. पुष्पांजलि के प्रति उन्होंने आभार प्रकट किया।

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