देश के पहले स्टेट लेवल डिजीज चार्ट के मुताबिक पूरे भारत पर Anxiety Disorder का बोझ बढ़ रहा है, खासकर पढ़े-लिखे और शहरी राज्यों में। यह चार्ट मेडिकल जर्नल ‘द लेंसेट’ में छपा है।
1990 में डब्लूएचओ के स्केल पर Anxiety Disorder 40वें नंबर पर थे वहीं 2016 में ये 26वें नंबर पर पहुंच गए हैं। सच कहें तो 2016 में भारत में बीमारियां होने की टॉप 10 वजहों में इसे शामिल किया गया था।
Anxiety Disorder सामान्य डर, पैनिक अटैक से लेकर ओसीडी तक हो सकते हैं फिर भी डिप्रेशन जितना गंभीर नहीं है। हालांकि यह डिसअबिलिटी और इकोनॉमिक प्रॉडक्शन गिरने की वजह हो सकता है।
स्टडी के मुताबिक महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल उन 10 राज्यों में से हैं जिनमें Anxiety Disorder की वजह से ज्यादा समस्याएं हैं। डॉ एम्स से ट्रेनिंग कर चुके साइकाइट्रिस्ट पल्लभ मौलिक का कहना है, ‘शहरीकरण Anxiety Disorder और डिप्रेशन की मुख्य वजह है।
मंबई के साइकाइट्रिस्ट हरीश शेट्टी कहते हैं ऐंग्जाइटी सभी मानसिक समस्याओं की जड़ है। डॉक्टर शेट्टी ने बताया कि बेचैन होना और Anxiety Disorder में फर्क है। इस तेज रफ्तार जीवन में दो-तिहाई लोग बेचैन रहते हैं वहीं 10 फीसदी लोगों को Anxiety Disorder होता है।’
ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर के शिकार कई लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं जो खुद को नुकसान पहुंचाते या सुसाइड कर लेते हैं। डॉ. मौलिक कहते हैं, ‘सबसे जरूरी संदेश यह है कि Anxiety Disorder को इग्नोर नहीं किया जा सकता।
कुछ लोगों में डिप्रेशन की शुरुआत ही होती है, उनको तुरंत मदद मिलनी चाहिए।’ बीते कुछ सालों में Anxiety Disorder और मृत्युदर में संबंध खोजा गया है। 2012 में ब्रिटिश जर्नल में छपी एक स्टडी के मुताबिक छोटी सी मानसिक समस्याओं से मौत की बड़ी वजहें जुड़ी हैं।
हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर Anxiety Disorder को आसानी से ठीक किया जा सकता है वहीं गंभीर ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर में दवाओं की जरूरत पड़ती है। डॉक्टर शेट्टी बताते हैं, ‘मेडिटेशन और योग से भी सामान्य ऐंग्जाइटी और ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर में मदद मिलती है।’
-एजेंसी
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