मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र मुकेश कुमार, ट्यूटन देवनाथ, अंकित सिंह, राजकुमार, दिलशाद अहमद, कुलदीप, अनुराग शर्मा, अर्जुन प्रताप सिंह, तरुण, राजवीर आदि आगरा के MSME सेण्टर में कम्प्यूटरीकृत संख्यात्मक नियंत्रण (सीएनसी) प्रणाली से रू-ब-रू हुए। अपने 10 दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण में छात्रों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के आगरा सेण्टर के तकनीकी विशेषज्ञों से कम्प्यूटर द्वारा मशीनों के नियंत्रण की विस्तार से जानकारी हासिल की। आगरा से लौटकर आए छात्रों ने अपने इस शैक्षणिक भ्रमण को मील का पत्थर बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की है।
ज्ञातव्य है कि संस्कृति विश्वविद्यालय ने इस साल शिक्षा सत्र के शुभारम्भ से ही छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ ही प्रायोगिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया है। आगरा के एमएसएमई सेण्टर में विशेषज्ञों ने छात्रों को बताया गया कि आज के समय में अधिकांश मशीनें कम्प्यूटर द्वारा नियंत्रित की जाती हैं। कम्प्यूटरीकृत संख्यात्मक नियंत्रण (सीएनसी) एक कंट्रोलिंग सिस्टम है, जोकि कम्प्यूटर जैसी डिजिटल के साथ मशीनों का नियंत्रण करती है। यह आटोमेटिक होती है और बिना आपरेटर मिलिंग मशीन, राउटर, वेल्डर, चक्की, लेजर कटर आदि को नियंत्रित कर सकती है। कम्प्यूटरीकृत संख्यात्मक नियंत्रण (सीएनसी) बहुत ही सटीक और स्मार्ट प्रणाली है।
विशेषज्ञों ने छात्रों को बताया कि सी.एन.सी. मशीन को कम्प्यूटराइज्ड न्यूमेरिकल द्वारा कंट्रोल किया जाता है। इस मशीन को आपरेट करना बहुत ही सुरक्षित होता है। यही कारण है कि आजकल इस मशीन की डिमांड बहुत ज्यादा है। दूसरी मशीनों की तुलना में इस मशीन का उत्पाद और गुणवत्ता उच्च स्तर की होती है। यही वजह है कि औद्योगिक क्षेत्र में सी.एन.सी. मशीनों का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। सी.एन.सी. (टी.सी.) इसका अपडेटेड वर्जन है। इस मशीन के सभी एक्सेस आटोमेटिकली काम करते हैं। मशीनों के कंट्रोल सिस्टम भी अलग-अलग होते हैं। अभी तक ज्यादातर चार कंट्रोल सिस्टम ही प्रयोग में लाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने छात्रों को टी.सी., वी.एम.सी., एच.एम.सी., वी.टी.एल. और टी.एम. पर भी विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि प्रोडक्शन के क्षेत्र में इन मशीनों का अधिकाधिक प्रयोग हो रहा है।
उप-कुलाधिपति राजेश गुप्ता का कहना है कि संस्कृति विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों को स्वावलम्बी बनाना है। इसी उद्देश्य से उन्हें लगातार प्रायोगिक प्रशिक्षण के लिए बड़े-बड़े औद्योगिक संस्थानों में भेजा जा रहा है।
कुलपति डा. देवेन्द्र पाठक का कहना है कि संस्कृति विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं को समयानुकूल शिक्षा प्रदत्त की जा रही है। यहां शीघ्र ही एम.एस.एम.ई. के साथ सेण्टर आफ एक्सीलेंस खोला जा रहा है ताकि जनपद के युवाओं का ध्यान नौकरी की बजाय स्वरोजगार की तरफ जाए। विभागाध्यक्ष मैकेनिकल इंजीनियरिंग विंसेंट बालू का कहना है कि आगरा के MSME सेण्टर से प्रशिक्षण लेकर लौटे छात्रों को भविष्य में अच्छा लाभ मिलेगा।
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