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Monday, 16 April 2018

किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय कृषक दल 18 अप्रैल को मिलेगा राज्यपाल से-दीक्षित

 हरदोई।16अप्रैल गेहूं क्रय केंद्र में हो रहे भ्रष्टाचार, हावी हो रहे बिचौलिए, तानाशाह क्रय केंद्र प्रभारी की हकीकत को मुख्य सचिव एवं महामहिम राज्यपाल को बताएगा भारतीय कृषक दल का एक प्रतिनिधिमंडल 18 अप्रैल को भारतीय कृषक दल का एक प्रतिनिधिमंडल लखनऊ जाकर शासन एवं सरकार के प्रतिनिधियों को देगा जानकारी -सरोज दीक्षित राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय कृषक दलकिसानों के गेहूं क्रय केंद्र बने बिचौलियों के अड्डा! उत्तर प्रदेश की सरकार का भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस का नारा हुआ बेकार !आइए आपको बताते हैं कि भ्रष्टाचार किस तरीके से होता है, उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश की सरकार, शासन ,जिला प्रशासन एवं को हकीकत से आम जनमानस को रूबरू कराएंगे संबंधित उस पर उचित कार्यवाही का निर्णय लेंगे सरोज दीक्षित उत्तर प्रदेश की सरकार ने किसानों से गेहूं क्रय करने हेतु सरकार की तरफ से न्यूनतम समर्थन मूल्य 1735 रुपया निर्धारित किया एवं ₹10 बोनस देने की बात कही बात उत्तर प्रदेश की है लेकिन रेंडम के तौर पर हरदोई, शाहजहांपुर जनपदों की हकीकत के बारे में आपको बताते हैं कैसे होता है भ्रष्टाचार  किसान का गेहूं क्रय करने के लिए सरकार व जिला प्रशासन ने साधन सहकारी समिति से लेकर विभिन्न विभागों द्वारा गेहूं क्रय केंद्र खोले  समितियों को यदि छोड़ दें तो अधिकतर क्रय केंद्र गल्ला मंडी में खोले गए  लेकिन इन पर बैठे कर्मचारियों पर कोई अंकुश नहीं लगा ₹50 प्रति कुंतल किसानों से लेने की आम चर्चा है केंद्र प्रभारी किसान से गेहूं में नमी होने, पल्लेदारी ,डाला आदि- आदि मनगढन्त बात कर बहला फुशला एवम  बिचौलियो के माध्यम से  किसान को विवश कर दिया जाता है कि वह अतिरिक्त धन अपनी जेब से दे  यदि किसान नहीं देता है तो उसका गेहूं सेंटर पर दो-तीन दिन के लिए लगवा लिया जाता और कहा जाता है कि अभी गेहूं तौल  नहीं पाएगा मजबूरी बस किसान ट्रैक्टर आदि का किराया ज्यादा न दे पाने के कारण  केंद्र प्रभारियों का शिकार हो जाता है कैसे लेते हैं  यदि कुछ चंद किसानों को छोड़ दें तो हकीकत यह है  कि किसान का गेहूं  बिना बिचौलियों के माध्यम से क्रय नही हो पा रहा है वहीं व्यापारियों का गेहूं समिति और सेंटरों पर अधिक मात्रा में खरीदा जा रहा है इसकी सत्यता की जांच के लिए अभी तक  साधन सहकारी समितियों एवं अन्य गेहूं क्रय केंद्रों पर खरीदे गए गेहूं की क्षेत्रफल बार ,किसान की स्थलीय जांच कर ली जाए उससे प्रतीत हो जाएगा कि गेहूं बिचौलियों मंडी के व्यापारियों अथवा दबंग लोगों  द्वारा किसानों के फर्जी  नामों से गेहूं बेचा गया !जिससे दूध का दूध पानी का पानी  हो जाएगा! सरकार , जिला प्रशासन , शासन को मेरा सुझाव है कि यदि भ्रष्टाचार पाया जाए  तो सरकार किसान के हित मे गेहूं क्रय केंद्र खोलने की जगह मोबाइल गेहूं क्रय केंद्र शुरू करके किसान का प्रत्येक ग्राम पंचायत से प्रत्येक मजरे से गेहूं क्रय करें जिससे सरकार की मंशा न्यूनतम समर्थन मूल्य किसान को देने की पूरी हो और बिचौलियों से बचा जा सके/

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