
जिलाधिकारी ने रिक्शा चालक के बेटे भानु की शिक्षा की जिम्मेदारी ली
जिलाधिकारी के इस उच्चतम कार्य के लिए सराहना
हरदोई-13अप्रैल कहते हैं प्रतिभा किसी से छिपाए नहीं छिपती, उसकी अंतर भावों की लाक्षणिक प्रकृति अनायास ही उभरने को विवश कर देती है। और क्या अच्छा हो कि जब उस अंतर संवेदनाओं को कोई सहयोगी “शाहिल” मिल जाए तो ऐसे निखार को अंतिम मुकाम हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसा ही जिले के जनप्रिय जिलाधिकारी पुलकित खरे का एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले 6 वर्षीय बालक भानु की प्रतिभा को का आकलन, प्रभावित कर गया और उसके अंतअस्त की पराज्ञानता को पहचान कर स्वर्णिम भविष्य के लिए उसकी शिक्षण व्यवस्था का जिम्मा उठाने का संकल्प लिया। जिसकी चहु ओर प्रशंसा की जा रही है।जिलाधिकारी पुलकित खरे ने अपनी पोस्ट में है अपने अंतर्मन के सम्वेदनाओं को इंगित करते हुए लिखा है कि “कुछ दिन मेरे खाते में भी ऐसे होते हैं,जब सर्विस की कुछ मजबूरियाँ परेशान करती हैं,हैरान करती हैं और घुटन की कगार पर ले जाती हैं।कल कुछ ऐसे ही पल थे पर आज फिर कुछ ऐसा हुआ,माननीय गवर्नर महोदय के कार्यक्रम से थका, जब मैं लौटा,तो एक प्रधान जी ने 2 मिनट के समय की मांग की,किसी से मिलवाना चाहते थे वो,व्यस्तता के कारण उन्हें शाम को आने को कहा। जिद्दी प्रधान जी आ भी पहुँचे शाम को,कुछ झुंझलाहट से उसे दिन भर की थकान के बाद भी बुलाया।क्या पता था कि वो मेरे कार्यकाल की,अब तक की सबसे मीठी मुलाक़ात करायेंगे।वह लिखते हैं कि 06 साल का वो बच्चा,कुछ डरा,कुछ सहमा,अपने पिता की उंगली थामे,प्रधान जी के साथ ऑफिस में मेरे पहुंचा।जब उसके पिताजी रिक्शा चलाने जाते हैं तो वो सरकारी प्राथमिक पाठशाला में शिक्षा के पहिये बढ़ाता है।06 साल की जादू की पुड़िया ने फिर दिखाया ऐसा धमाल,दंग था मैं देखकर पहाड़ों(Tables) का अद्भुत कमाल।
मैं पूछता गया,वो सुनाता गया। देखते-देखते उसने सुनाकर लिख डाले 13,17,23,27,33,37 के पहाड़े,बिना रुके,बिना सोचे।फिर गिनतियाँ और ABCD,एक बच्चा जो कभी अपने गाँव से बाहर नहीं गया।ललक दिखी, शिक्षा की ,उसकी आँखों में
एक आस दिखी,तोड़ नहीं सकता जिसे।सलाम है उन प्रधान जी को,जो जरिया बने।सलाम है उस पिता को,जो स्वयं दूसरी तक पढ़ा है,पर बच्चे को रोज पढ़ाता है,उस लौ को रोज़ जलाता है।आज गवर्नर, दो एम एलए,दो बड़े अधिकारियों से मुलाकात हुयी, कुछ बात हुयी,क्या बात हुयी,शायद भूल जाऊं कुछ महीनों में।पर भानू से ये मुलाकात,है ईश्वर की सौगात।अब भानू की शिक्षा की ज़िम्मेदारी लेने का ठाना है, ईश्वर भानू और मुझे शक्ति दे।हाँ, खराब दिन जरूर आते हैं,पर इस सर्विस के कारण उम्मीदों को सहारा दे पाने का जरिया बनना,उसकी इनायत नहीं तो और क्या है।
इतनी शक्ति हमें देना दाता”जिलाधिकारी पुलकित खरे इस विलक्षण प्रतिभा के बच्चे हमसे भानु से मिलकर ईश्वर का संयोग बताते हैं और उसकी शिक्षण की जिम्मेदारी का निर्वाहन करने का जिम्मा लेते हैं वास्तव में उनकी इस दरियादिली का कोई जवाब नहीं है।

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