मुंबई । बॉलिवुड ऐक्ट्रेसे शहाणा गोस्वामी ने इंटरव्यू के दौरान कहा था, बॉलिवुड में मेरे जैसी सांवले रंग की लड़कियों या लड़कों की अपेक्षा गोरे रंग की लड़कियों की प्राथमिकता ज्यादा दी जाती है। मैं एक बार अपने सांवले रंग की वजह से एक फिल्म से बाहर निकाल दी गई थी। बॉलिवुड की टॉप ऐक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान यह बात कबूली है कि अपने डार्क रंग की वजह से उनके हाथों से एक हॉलिवुड फिल्म निकल गई।

प्रियंका ने कहा कि पिछले साल जब वह एक फिल्म की शूटिंग के लिए बाहर गई हुई थीं, तब एक स्टूडियो से उनके मैनेजर की बात हुई। मैनेजर को कहा गया कि प्रियंका फिल्म के लिए फिट नहीं हैं और इसकी वजह उनकी फिजिकैलिटी बताई गई। बाद में जब इस बारे में पड़ताल की गई, तो पता चला कि फिजिकैलिटी का तात्पर्य उनकी स्किन कलर से था। इससे एक बात साफ हो गई कि हॉलिवुड में भी कलाकार रंगभेद का शिकार होते हैं, मगर हम एक निगाह बॉलिवुड पर डालें, तो रंगभेद के मसले पर हॉलिवुड की तुलना में बॉलिवुड कहीं आगे है। ऐक्ट्रेसेज की कास्टिंग ही नहीं, बल्कि बॉलिवुड के गानों और विज्ञापनों में भी रंगभेद साफ नजर आता है। भले ही बॉलिवुड में सोच प्रेरक सिनेमा के मामले में काफी आगे बढ़ा हो, लेकिन इंडस्ट्री के कई नामी लोगों की मानसिकता जस के तस है।
प्रड्यूसर्स और डायरेक्टर्स को अपनी ऐक्ट्रेस गोरी, लंबी और छरहरी काया वाली ही चाहिए, जिसका खामियाजा ऐसे कई सशक्त ऐक्टर्स को भुगतना पड़ता है, जिनका रंग सांवला है। तनिष्ठा चैटर्जी जैसी ऐक्ट्रेस जब एक कॉमिडी शो में जाती हैं, तो उनके रंग को लेकर मजाक बनाया जाता है। हालांकि, खुद पर की गई नस्लभेद टिप्पणी को लेकर तनिष्ठा ने चैनल और शो को खरी-खरी सुनाई। वहीं, मनोज बाजपेयी को उनकी फिल्म जुबैदा के लिए परफेक्ट कास्ट नहीं कहा गया था। दरअसल क्रिटिक्स का तर्क था कि मनोज कहीं से भी राजा नहीं दिखते हैं। बिपाशा बसु को कई फीमेल ऐक्ट्रेसेज काली बिल्ली कहकर बुलाया करती थीं।

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