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Thursday, 28 June 2018

हर्षवर्धन बोले- केजरीवाल सरकार ने दी पेड़ काटने की इजाजत, AAP बौखलाई…

नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री हर्षवर्धन ने आज दक्षिणी दिल्ली की 7 कोलोनियों की पुर्निवकास योजना में पेड़ काटने की इजाजत केंद्र सरकार द्वारा देने के आम आदमी पार्टी के आरोप को गलत करार देते हुए कहा है कि पेड़ काटने की इजाजत दिल्ली सरकार ने दी है।

हर्षवर्धन ने कहा कि पेड़ काटने की मंजूरी देने से पहले ना तो दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से कोई पूर्व इजाजत ली और ना ही कानून के तहत ऐसी कोई अनुमति लेने की राज्य सरकार की बाध्यता है। उन्होंने साफ किया कि परियोजना में पेड़ काटने की कार्रवाई दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994 के तहत दिल्ली सरकार के सम्बंधित अधिकारियों की इजाजत से हुई है।

बता दें कि AAP प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने आज इस परियोजना में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा पेड़ काटने की अनुमति देने सम्बंधी दस्तावेका पेश करते हुए हर्षवर्धन पर इस बारे में ग़लत जनकारी दे कर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में हर्षवर्धन ने सफाई देते हुए कहा कि केंद्र सरकार की पर्यावरण मंजूरी एक पेड़ काटने के एवज में 10 पेड़ लगाने की स्पष्ट शर्त के साथ दी गई थी।

AAP ने पेड़ काटने की मंजूरी देने को लेकर हर्षवर्धन पर दस्तावेजी सबूतों के हवाले से गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है। आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने बताया कि केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हाल ही में 12 जून को इन कालोनियों में 11 हजार पेड़ काटने की मंजूरी दी है।

मंजूरी से जुड़े दस्तावेज पेश करते हुए भारद्वाज ने कहा कि मंत्रालय ने किसी भी परियोजना में पेड़ काटने की मंजूरी देने के बाद जनसुनवाई करने की अनिवार्यता के प्रावधान को भी दरकिनार कर दक्षिणी दिल्ली के पुर्निवकास की परियोजना को जनसुनवाई कराने से छूट दे दी ।

उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय के कामकाज में लापरवाही का भी आरोप लगाते हुए कहा कि मंत्रालय द्वारा पेड़ काटने के लिए जारी मंजूरी के पत्र में जनसुनवाई की तारीख एक जनवरी 1900 बताई गई है। भारद्वाज ने कहा कि एक ओर मंत्रालय जनसुनवाई से इस परियोजना को छूट दे रहा है और दूसरी ओर 118 साल पहले जनसुनवाई कराने का भी जिक्र कर रहा है।

आप प्रवक्ता ने अब तक जो नुकसान हुआ है, उसे रोकने की केन्द्र की मोदी सरकार से मांग करते हुए कहा कि केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को इस योजना से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के आंकलन संबंधी पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट पर पुर्निवचार करते हुए पर्यावरण के नुकसान को तत्काल रोकना चाहिए।

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