उरई। गत एक सप्ताह पूर्व धन के लोभी पित-पुत्र गांव के ही इकलौते मासूम बच्चे की बलि दे दी थी। मासूम का शव तालाब मे मिलने से गांव मे सनसनी फैल गयी थी। शव को देख मासूम के परिजनों मे कोहराम मच गया था। तभी मासूम के ताऊ ने मामला दर्ज करा दिया था। तभी पुलिस मामले की जांच मे जुट गयी थी। जांच के दौरान पुलिस ने गांव के ही पिताकृपुत्र को हत्या के आरोप मेे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधीक्षक अमरेन्द्र प्रसाद सिंह ने पुलिस लाइन के सभागार मे खुलासा करते हुये बताया कि 24 मई को इन्द्रपाल के इकलौते पुत्र सम्राट ढ़ाई वर्ष की अपहरण कर हत्या कर दी गयी थी। मासूम का शव तालाब फट्टी में छिपा पड़ा मिला था। तभी मासूम के ताऊ चतुर सिंह पुत्र लल्लू निवासी ग्राम कैथ थाना जालौन ने अज्ञात हत्यारो के विरूद्ध थाने मे तहरीर दी थी। जालौन पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। वही पुलिस अधीक्षक ने जालौन कोतवाली पुलिस व स्वाट व सर्विलांस को खुलासा के लिये निर्दोषित कर दिया गया था।
वही अपर पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र नाथ तिवारी व जालौन सीओ संजय कुमार सिंह ने कुशल निर्देशन मे काम कर रही टीम ने ग्राम कैथ के ही पिता पुत्र को गिरफ्ता कर लिया। वही जालौन कोतवाल संज कुमार गुप्ता व स्वाट टीम ने बद्री प्रसाद व उसके पिता ने कसाई को साक्ष्यो के आधार पर गिरफ्तार कर लिया। वही रामपाल पुत्र बद्रीप्रसाद पाल व बद्री प्रसाद पाल पुत्र नेकसाई ग्राम कैथ थाना कोतवाली जालौन जनपद जालौन मे पूछताछ पर बताया कि मै भगवान कारस देव का पुजारी हूं। गांव मे तंत्र मंत्र तथा भगत गीरी का काम करता हूं। मुझे लगभग डेढ़ माह पहले एक तांत्रिक ने बताया था कि तुम्हारे घर मे गढ़ा हुआ धन है। तुम्हे बहुत जल्दी माया मिलेगी। मेरे ऊपर देवी कालका माई की सवारी आती है। मुझे स्वपन मे कालका माई ने बताया था कि तुम्हारे घर मे गढ़ा हुआ धन है उसे उठा लो। मैने तब अपने घर मे खुदाई की थी किन्तु मुझे धन नही मिला। उसके बाद करीब एक माह पहले मेरे स्वपन मे रोज कालका माई बताती थी कि तुम्हे एक ऐसे बालक की बलि देनी होगी जो अपने माता पिता का अकेला पुत्र हो और उनका पहला बच्चा हो जिसके कोई दूसरी संतान न हो। इसके बाद मुझे रोज स्वपन मे खजाना दिखाई देता था। जिसमे चार सोने के कलशे, सोने की गिन्नियां से भरे हुये तथा दो सोने की ईटे दिखायी देती थी और कालका माई कहती थी एक हाथ दो एक हाथ लो मतलब बलि दो और खजाना उठाओ। तब मैने यह बात अपने पिता जी बद्रीप्रसाद पुत्र नेकसाई को बतायी और पिता जी से राय विचार करके कालका माई द्वारा जैसा बताया गया था उस तरह का बच्चा इन्द्रपाल का पुत्र सम्राट उर्फ गुन्नू जो अपने माता पिता का अकेला और पहली पीढी का बच्चा था हमने चुना। इस कार्य के लिये दशहरा का दिन सबसे उपुक्त दिन होता है। इस दिन तांत्रिक कार्य सफल होते है। इसलिये दिनांक 24 मई 2018 को हमने दशहरा के दिन सम्राट उर्फ गुन्नू को उसके घर के बाहर से उठाकर अपने घर मे ले जाकर उसे स्थान पर जहां धन मिलने की सम्भावना थी रखकर उसका गला दबाकर देवी को उसकी बलि चढ़ा दी। उसके बाद उसके गले मे पड़ी हुयी मोती की माला जिसमे तीन हाय पड़ी हुयी थी। मैने निकाल कर अपने घर मे छिपा दी थी। फिर उसी दिन शाम 5 बजे बहुत तेज आंधी पानी आया। उस समय गांव के सारे लोग अपने अपने घरो मे चले गये। तब मैने मौका पाकर सम्राट के शव को मंदिर वाले तालाब के पूर्वी किनारे पर गोबर व कूड़े के ढ़ेर मे छिपा दिया था तथा शव को जिस टाट फट्टी मे लपेट कर मै गया था उस टाट फट्टी को तालाब के पास ही बबूल के झाडियो मे छिपा दिया था। इस पूरे घटना क्रम मे मेरे पिता निगरानी एवं सहयोग के लिये मेरे साथ दिया।

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