लखनऊ। केजीएमयू में अब सांप काटने, जहर खाने या किसी और तरह के केमिकल खाकर आने वाले मरीजों को और बेहतर इलाज मिल सकेगा। इसके लिए फोरेंसिक मेडिसिन विभाग टॉक्सिकोलॉजी लैब बनाने जा रहा है। जहर या टॉक्सिन की जांच के लिए यह फॉरेंसिक मेडिसिन में देश की पहली लैब होगी।
केजीएमयू देश की पहली टॉक्सिकोलॉजी लैब बनाने जा रही है। अब तक इस तरह की लैब केवल पुलिस में होती है जो मेडिको लीगल के केस की जांच करते हैं। मरीज ने किस तरह का जहर या केमिकल खाया है यह उसके ब्लड और यूरीन की जांच से पता लगाया जाएगा, जिससे उसके आगे इलाज में मदद मिल सकेगी।
केजीएमयू के ट्रॉमा में आरक्षित होंगे बेड
केजीएमयू फोरेंसिक मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ.अनूप वर्मा ने बताया कि मरीजों के इलाज के लिए क्रिटिकल केयर टॉक्सिकोलॉजी की सुविधा शुरू की जाएगी। इसके लिए ट्रॉमा सेंटर में छह बेड आरक्षित किए जाएंगे। क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के डॉ. अविनाश अग्रवाल के साथ मिलकर इस वार्ड में मरीजों को अलग से इलाज की सुविधा मिलेगी। प्रो. अनूप ने बताया कि अभी तक जहर खाने के मरीजों का लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है। मरीज का पेट साफ करने के बाद लक्षणों का इलाज किया जाता है, लेकिन अगर यह पता चल जाए कि मरीज के शरीर में किस प्रकार का विष या केमिकल पहुंचा है तो उसका सही तरीके से इलाज हो सकेगा।

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