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Friday, 11 January 2019

माया अखिलेश की प्रेसवार्ता आज, होगा गठबंधन का ऐलान

लखनऊ। यूपी की सियासत में आज नया मोड़ आ सकता है। दो बड़े राजनैतिक दल चौबीस साल बाद लोकसभा चुनाव के लिए एक साथ आ रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती व समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव मिशन 2019 को फतेह करने के लिए नए महागठबंधन का ऐलान कर सकते हैं। सपा-बसपा के दोनों दिग्गज नेता 12 जनवरी को लखनऊ के एक होटल में नए गठबंधन का औपचारिक ऐलान करते हुए इसके स्वरूप का खुलासा करेंगे। अखिलेश यादव ने कहा है कि यह महागठबंधन चुनाव में भारी जीत दर्ज करेगा।

तय हुआ हो चुका है फार्मूला
सूत्रों के मुताबिक सपा 35 सीटों पर तो बसपा 36 सीटों पर लड़ेगी। हाल ही अखिलेश यादव ने दिल्ली में मायावती के आवास पर गठबंधन व सीटों पर लंबी चर्चा की थी। अब करीब करीब साफ है कि कांग्रेस गठबंधन से बाहर ही रहेगी। सपा बसपा दोनों के तेवर कांग्रेस के प्रति तल्ख दिख रहे हैं लेकिन इतना जरूर है कि गठबंधन यूपी में कांग्रेस के मांगे बिना उसके लिए अमेठी व रायबरेली जैसी उसकी सिटिंग सीटें छोड़ रहा है। तीन सीटें रालोद को दी जा सकती हैं जबकि 4 सीटें रिजर्व रखी जा सकती हैं। इसमें एक सीट ओम प्रकाश राजभर के लिए छोड़ी जा सकती है। अगर छोटे सहयोगी दलों से पूरी तरह बात नहीं बनी तो सपा दो और सीटों पर और बसपा एक और सीट पर लड़ सकती है।

अखिलेश के बचाव में आगे आई बसपा
प्रदेश में अवैध खनन मामले को लेकर सीबीआई द्धारा शिकंजा कसने के बाद मायावती ने अखिलेश यादव को फोन कर कहा कि डरने की जरूरत नहीं है। मायावती ने इसे बीजेपी का चुनावी षड्यंत्र करार देते हुए कहा था कि ये बीजेपी का पुराना हथकंडा है। भाजपा इसे अपने मतलब के लिए समय समय पर अपने विरोधियों के खिलाफ आजमाती रहती है। यही नहीं सपा के महासचिव राम गोपाल यादव और बसपा के सतीष चंद्र मिश्रा ने हाल ही में संयुक्त प्रेस कॉन्फेंस करके बीजेपी पर करारा हमला बोला था। सतीष चंद्र मिश्रा ने अखिलेश यादव काबचाव करते हुए कहा कि मुद्दों से भटकाने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है।

उपचुनाव में जीत से दोस्ती परवान चढ़ी
सपा-बसपा की दोस्ती का आगाज गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा उपचुनाव से हुआ जब बसपा ने इस चुनाव में सपा को समर्थन दिया। दोनों सीटे जीत के बाद यह दोस्ती परवान चढ़ने लगी। इसी के साथ गठबंधन को लेकर अंदरखाने बातचीत भी चलती रही। अखिलेश यादव ने कई बार कहा कि वह गठबंधन के लिए त्याग करने को तैयार हैं जबकि मायावती ने सम्मानजनक सीटें मिलने की बात कही।

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