गांधी जी द्वारा स्थापित तमिलनाडु में हिंदी प्रचार सभा के 100 साल पूरे हुए | Alienture हिन्दी

Breaking

Post Top Ad

X

Post Top Ad

Recommended Post Slide Out For Blogger

Friday, 22 February 2019

गांधी जी द्वारा स्थापित तमिलनाडु में हिंदी प्रचार सभा के 100 साल पूरे हुए

राष्ट्रपति ने हिंदी प्रचार सभा में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया-

तमिलनाडु ब्यूरो से डॉ आर.बी. चौधरी
चेन्नई (तमिलनाडु)। आप कहीं के रहने वाले हो किन्तु जहां पर आप रहते हैं,वहां की भाषा आपको आनी चाहिए , बस वहां के अपने बनने में देर नहीं लगेगी क्योंकि , किसी राज्य की भाषा सीखना सिर्फ आपके लिए ज्ञानार्जन ही नहीं है बल्कि वह आपको वहां की रहन- सहन, लोक संस्कृति एवं सभ्यता से घुलने- घुलने मिलने का बहुत बड़ा अवसर प्रदान करेगा। यही कारण है कि भाषाएं हमारे जीवन में संबंधों के नए -नए सोपान बनाती है, यह बात भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में महात्मा गांधी की एक प्रतिमा का अनावरण करने के बाद एक सभा के संबोधन में कहा ।

दक्षिण भारतहिंदी प्रचार सभा यह 100 साल पूरा होने के अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वह दिल्ली में उत्तर भारतीय स्कूली बच्चों के तमिल सीखने की जिज्ञासा उदाहरण दिया और कहा की वह उनके मन को छू गया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के बीच चलाए जा रहे हैं डुएल प्रोग्राम के तहत भारतीय भाषाओं को दिखने में बड़ी मदद मिल रही है और यही कारण है कि हिंदी के साथ साथ तमिल जैसी पौराणिक भाषा भी खूब लोकप्रिय हो रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के कदम राष्ट्रीय सद्भाव को मजबूत करते हैं और जोड़ते हैं । इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति अपने भाषण की शुरुआत तमिल से किया और फिर बारी – बारी से अंग्रेजी तथा हिंदी में बोलते चले गए। सभा में आगंतुक भाषा प्रेमी, विद्यार्थी , शिक्षा और अन्य अधिकारीगण सभी मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे। राष्ट्रपति ने कहा कि अन्य राज्यों की भाषाओं को सीखने का व्यावहारिक लाभ अद्भुत एवं अनमोल है।

राष्ट्रपति ने भाषा और संचार माध्यमों में उसकी अहमियत का जिक्र करते हुए रोजमर्रा के कामकाज में मिलने वाले तमाम प्रकार की सहूलियत के कई उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि आज हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहां एक एक तरफ भारतीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है तो वहीं दूसरी तरफ विकास की गति के साथ- साथ भाषा की भूमिका बढ़ती जा रही है। एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच में भाषा एक सेतु बनाती है। देश के एक हिस्से से निकल कर आज हर नौजवान देश के दूसरे हिस्से में अपना योगदान दे रहा है, वहां रहने वाले सभी निवासियों के लिए वहां की भाषा एक शक्ति एवं संपत्ति होती है। भाषाएं किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व , प्रतिभा और मानवीय मूल्यों को निखरता और वहां की धरती से जोड़ता है।

राष्ट्रपति ने भारतीय भाषाओं के संवर्धन में सुब्रमण्यम भारती, पेरियार, आखिरी गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी और पूर्व राष्ट्रपति आर. वेंकटरमण के योगदान को याद दिलाया और कहा कि यह सभी लोग तमिलनाडु के ही बहुभाषी बुद्धिजीवी थे। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के अध्यक्ष शिवराज वी. पाटिल ने कहा कि मूर्ति का अनावरण का आयोजन इसलिए किया गया था कि महात्मा गांधी के व्यक्तित्व एवं आदर्शों को लोग स्मरण करें। महात्मा गांधी के आदर्शों से लोग प्रेरित हो। साथ ही भारत की एकता, अखंडता और एकता को बनाए रखने के हिंदी सहित राज्य की भाषाओं को एक सूत्र में बांधने के हाथ बटाएं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी द्वारा स्थापित दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के 100 साल पूरे हो चुके हैं।

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad