लखनऊ। मोतियाबिंद के 100 से अधिक रोगियों ने आज गुरुग्राम में कंप्लीट आई केयर सेंटर द्वारा आयोजित एक इंटरेक्टिव सेशन में भाग लिया। नयन दृ लिंविंग विध ग्लूकोमाष् के बैनर के नाम के तहत इस सेशन का उद्देश्य सभी लोगों को एक साथ एकजुट कर के मोतियाबिंद के खिलाफ हाथ मिलाना है। यह जनता के बीच मोतियाबिंद के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए नेत्र श्रृंखला द्वारा की गई अपनी तरह की पहली पहल है।
आई ड्रॉप डालने का यह सही तरीका

घटना के मुख्य आकर्षण में मोतियाबिंद के रोगियों के साथ बातचीत शामिल थी। जिसमें उनके रोग प्रबंधन और चित्रकला जैसी कई गतिविधियों का वर्णन किया गया था। ताकि उनकी बीमारी को बेहतर तरीके से रोका जा सके। आंख से जूझना उनके लिए मुश्किल का काम हो जाता है। इसलिए सभी मरीजों को आई ड्रॉप डालने का सही तरीका भी सिखाया गया। रोगियों के उपचार के तरीकों में प्रगति और समय पर निदान के महत्व पर चर्चा की गई।
मोतियाबिंद को एक बीमारी के रूप में खत्म करने में हम सक्षम —डॉ सोनी

आई केयर सेंटर के वरिष्ठ सलाहकार और निदेशक डॉक्टर पारुल सोनी का कहना है कि मोतियाबिंद न केवल दृष्टि को प्रभावित करता है बल्कि व्यक्ति और उनके परिवारों के जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। नयन मोतियाबिंद के रोगियों को उनकी बीमारी को बेहतर ढंग से समझने और उन्हें इसके साथ रहने के लिए सीखने के लिए सशक्त बनाने के लिए एक पहल है। नियमित रूप से चल रहे उपचार के साथ.साथ कुछ जीवनशैली में बदलाव आने से निश्चित रूप से उन्हें मदद मिलेगी और यह हमारी आशा है कि मोतियाबिंद को एक बीमारी के रूप में खत्म करने में हम सक्षम रहेंगे।
90 से अधिक रोगी पता लगाने में चूक जाते
डॉक्टर सोनी ने आगे कहा मोतियाबिंद की प्रारंभिक अवस्था में कोई लक्षण नहीं होने के कारण कभी न ठीक होने वाले अंधेपन का प्रमुख कारण बनता है। यही कारण है कि 90 से अधिक रोगी इसका पता लगाने में चूक जाते हैं और जब तक यह पता चलता है तब तक समस्या गंभीर हो चुकी होती है। अनुमान के हिसाब से लगभग 60 भारतीय आबादी मोतियाबिंद जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ चुकी है और हर साल 12 लाख से अधिक लोग अपनी दृष्टि खो देते हैं। नयन के माध्यम से हम मौजूदा रोगियों को बीमारी के बेहतर प्रबंधन और दूसरों के लिए इसे रोकने के लिए निवारक उपायों के बारे में पर्याप्त समझ प्रदान करने का लक्ष्य रखते हैं।

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