नई दिल्ली। प्रत्यक्ष कर की वसूली में कमी के बाद इनकम टैक्स विभाग काफी सख्त होने जा रहा है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) ने इनकम टैक्स विभाग को टैक्स के दायरे में आने के बावजूद रिटर्न फाइल नहीं करने वाले एवं रिटर्न फाइल करना बंद करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। खासकर उन लोगों के खिलाफ जो पहले रिटर्न फाइल करते थे, लेकिन अब नहीं कर रहे हैं। इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक जिन लोगों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है उनमें 2 करोड़ से अधिक लोग हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर ली गई है। ये वो लोग है 2013-2017 के बीच या तो रिटर्न फाइल नहीं किया है या फिर रिटर्न फाइल करना बंद कर दिया है। सीबीडीटी ने इनकम टैक्स विभाग को आगामी 30 जून तक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
31 दिसंबर के बाद रिटर्न फाइल करने पर 10,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान
टैक्स के अधिकारियों ने बताया कि चिन्हित लोगों को नोटिस भेजने का काम शुरू हो गया है। विभाग के मुताबिक इन लोगों की पहचान दो तरीके से की जाती है। इनकम टैक्स विभाग में नॉन फाइलर मोनिटरिंग सिस्टम (एनएमएस) है जो इन लोगों की पहचान का काम करती है। वहीं ड्राप फाइलर मतलब जो पहले रिटर्न फाइल करते थे, अब नहीं करते हैं। ऐसे लोगों की संख्या 25 लाख है। इन सभी को देश भर में नोटिस भेजने का काम शुरू हो गया है। अभी देर से रिटर्न फाइल करने वालों से जुर्माना लेने का प्रावधान है। नियम के मुताबिक 31 अगस्त के बाद लेकिन 31 दिसंबर से पहले रिटर्न फाइल करने वालों से 5000 रुपए के जुर्माना लिया जाता है। 31 दिसंबर के बाद रिटर्न फाइल करने वालों से 10,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि अगर किसी की कुल आय 5 लाख सालाना से कम है तो उससे अधिकतम 1000 रुपए का जुर्माना लिया जाएगा।
2013 के बाद से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में तेजी से गिरावट
इनकम टैक्स के अधिकारियों ने बताया कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी है, उनके डाटा को सभी रिजनल ऑफिस के साथ शेयर कर दिया गया है। उन्होंने बतााय कि मोनिटरिंग सिस्टम से प्राप्त डाटा के मुताबिक 2013 के बाद से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में रिटर्न फाइल नहीं करने वालों की संख्या 11 लाख थी जो 2015 में बढ़कर 67 लाख हो गई। ड्राप फाइलर की संख्या में भी इजाफा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 18 में यह संख्या 25 लाख से अधिक हो गई है।
टैक्स कलेक्शन बढ़ाने की कोशिश
इनकम टैक्स अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार से टैक्स कलेक्शन की समीक्षा करने एवं डाटा की निगरानी करने के साथ डिजिटल पेमेंट की मदद से टैक्स के दायरे को आसानी से बढ़ाया जा सकता है। इनकम टैक्स विभाग के दायरे में आने वाले लोगों के खिलाफ तीन माह से लेकर दो साल तक में कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। अगर 25 लाख रुपए से अधिक का सालाना इनकम है तो यह अवधि और भी बढ़ सकती है।

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