राहुल मिश्रा पर है फर्जी वसीयत बनाकर फ्राड करके सम्पत्ति बेचने का आरोप
लखनऊ। श्याम बहार पान मसाला की नींव रखने वाले संजीव मिश्रा की मौत के बाद से उनकी व्यक्तिगत सम्पत्ति को फर्जी वसीयत बनाकर बेचने के मामले में अभियुक्त राहुल मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जबकि मालती मिश्रा व सुबोध मिश्रा फरार हैं। ज्ञात हो कि राहुल मिश्रा, सुबोध मिश्रा व मालती मिश्रा ने फर्जी वसीयत बनाकर उसे रजिस्ट्रार आफिस के अधिकारियों व कर्मचारियों से मिली-भगत करके असली साबित करके, संजीव मिश्रा की काफी सम्पत्ति को बेच डाला था। प्रकरण की जानकारी होने पर संजीव मिश्रा की पत्नी मीनाक्षी मिश्रा ने उच्च अधिकारियों से शिकायत की तो उप जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व व निबंधक कार्यालय के अधिकारियों ने जांच में पाया कि उक्त वसीयत फर्जी एवं जाली है।
फर्जी वसीयत को बड़े ही शातिराना तरीके से निबंधक कार्यालय के अभिलेखों में इस तरह शामिल कराया गया था कि वह बिल्कुल असली लगती थी। हैरत की बात यह थी कि प्रमाणित प्रति निकलवाने पर भी फर्जी वसीयत ही निकलती थी। उच्च अधिकारियों की जांच में वसीयत फर्जी साबित होने पर कोतवाली वजीरगंज में दिनंाक 27 जून 2016 को मुकदमा सं0 401, गंभीर धाराओं में पंजीकृत कराया गया था। अभियोग में न्यायालय ने राहुल मिश्रा, मालती मिश्रा व सुबोध मिश्रा जो कि फरार चल रहे थे, तीनों के खिलाफ गैर जमानतीय वारन्ट जारी किया था, जिसमें राहुल मिश्रा की गिरफ्तारी कर आज दिनंाक 24 अप्रैल 2019 को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए राहुल मिश्रा को जेल भेज दिया। जबकि मालती मिश्रा व सुबोध मिश्रा अभी भी फरार हैं।
फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर उपरोक्त लोगों द्वारा संजीव मिश्रा की तमाम व्यक्तिगत सम्पत्तियों को बेचा गया था, जिस पर, मृतक संजीव मिश्रा की पत्नी की ओर से कई आपराधिक मुकदमें दर्ज कराए गए थे। आई.आई.एम. रोड, लखनऊ पर स्थित ग्राम रायपुर एवं मुतक्कीपुर में संजीव मिश्रा की बेशकीमती जमीनों के साथ-साथ राजधानी लखनऊ के अलीगंज, बी- ब्लाॅक स्थित एक भवन समेत लखनऊ में कई अन्य स्थानों पर मौजूद सम्पत्तियों को भी इनके द्वारा गलत तरीके से बेचा गया है। साथ ही कानपुर एवं कोलकाता समेत कई स्थानों पर भी करोडों रूपये की सम्पत्तियां बेची गई हैं।
मृतक संजीव मिश्रा की श्याम बहार गुटखा के ट्रेडमार्क को भी राहुल मिश्रा ने गलत हलफनामें के आधार पर हथिया लिया था, जिसके संबंध में भी वजीरगंज कोतवाली में ही एक अन्य मुकदमा दर्ज है। इनका आपराधिक इतिहास संलग्न है।

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