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Thursday, 25 April 2019

टिकट काउंटर पर दलालों के जमावडे से यात्री परेशान, विभाग नही कर रहा कोई कार्यवाही

टिकट काउंटर पर दलालों के जमावडे से यात्री परेशान, विभाग नही कर रहा कोई कार्यवाही

आरा(विक्रांत राय/रितेश चौरसिया)। दानापुर रेल मंडल के आरा रेलवे स्टेशन पर आरक्षित टिकटों की कालाबाजारी को रोकने के लिए लाख नये नियम-कानून बनाए जाते है लेकिन आरक्षण काउंटरों पर टिकट की दलाली करने वाले दलालों पर पूरी तरह से अंकुश नहीं लग पा रहा है। कई बार दलालों पर कार्यवाही होने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी है। आरा स्टेशन पर आरक्षण टिकट काउंटरों का यह हाल है कि तत्काल टिकटों के लिए सुबह से ही दलालों के चहेते यहां आकर डेरा जमा लेते हैं। सुबह जब तक आम लोग अपना नंबर लगाएं, तब तक दलाल टिकट लेकर चलते बनते हैं। इसे लेकर आए दिन पब्लिक व रिजर्वेशन स्टाफों में कहा-सुनी भी होती है। इसके अलावा आरा स्टेशन पर महिलाओं, बुजर्ग, वीआईपी को एक ही आरक्षण खिड़की की व्यवस्था होने से भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तत्काल आरक्षित टिकटों के लिए लोग सुबह से ही टिकट काउंटरों पर भीड़ लगा रहे हैं। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, पुणे, सिकंदराबाद, बैंगलोर आदि जगहों के टिकटों की बिक्री अधिक हो रही है। सुबह दस बजे से तत्काल आरक्षण सेवा शुरू होने के बाद मुश्किल से दो-चार लोगों को कंफर्म टिकट मिल पाता है। इसके बाद प्रतीक्षा सूची वेटिंग शुरू हो जाती है। इससे तमाम लोग निराश हो कर चले जाते हैं। तमाम लंबी दूरी की ट्रेनों में अगले महीनों तक रिजर्वेशन फुल होने पर तत्काल टिकट ही सहारा बन रहा है। इससे इन टिकटों के लिए मारा-मारी मची हुई है। वही रेल सूत्रों की माने तो इस तरह का खेल कुछ माह से चल रहा है। पहले अशोक, अश्वनी व आर के सिंह काउंटर पर रहते थे, तो उनके सामने दलाल भटकना तो दूर पास आने में सोचते थे, लेकिन आरा जक्शन का दुर्भाग्य है, इन जैसे लोगो को न रहना आम यात्रियों को खटकता है। फिलहाल आर के सिंह तो आरा में ही पोस्टेड है। जब तक रिजवेशन काउंटर पर वे रहते है, तो टिकट आसानी से आम यात्रियों को मिल जाता है।

कंफर्म सीट को दुगने से ज्यादा दाम में बेचते है दलाल

गर्मी की छुट्टी होते ही लोग छुट्टी बिताने के लिए हिल स्टेशन घूमने के लिए या दर्शन करने के लिए जाते हैं। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या लोगों के सामने कन्फर्म टिकट की आती है। जब टिकट लेने के लिए या टिकट काउंटर पर पहुंचते हैं तो वहां पहले से ही लंबी लाइने रहती है। आरक्षण काउंटरों पर दलालों के कब्जे के कारण लोगों को टिकट नहीं मिल पाती है। दानापुर रेल मंडल के सभी स्टेशनों पर आरा, बिहिया, डुमराव, बक्सर जैसे बड़े स्टेशनों पर आरक्षण काउंटर पर दलालो का दबदबा कायम है। दलाल सभी काउंटर पर पहले से ही अपने आदमियों को खड़ा करके रखते हैं। ऐसे में अगर कोई पैसेंजर लाइन में खड़ा होता है तो दूसरा आकर कहता है कि मैं पहले से यहां खड़ा था और उसको लेकर नोक-झोंक शुरू हो जाती है। कॉर्मशियल स्टॉफ की मिलीभगत से दलाल एक साथ दो-चार टिकट बनवाते हैं और बाद में इन्ही कंफर्म सीट को दोगुने से भी ज्यादा दाम में बेचते हैं।

तत्काल टिकट के लिए मनमानी वसूली

रेल विभाग की कड़ाई के चलते दलालों ने अपना काम करने का तरीका बदल दिया है। अब ये सीधे लाइन में लग कर टिकट नहीं निकलवाते बल्कि अपने चहेते किशोरों व युवकों को कतारबद्ध कर देते हैं। इससे जांच होने पर ये साफ बच जाते हैं। ये लोग तत्काल टिकटों के लिए जरूरी कई पहचान पत्र भी साथ रखते हैं। टिकटों की कालाबाजारी से दलालों को दोगुना से भी ज्यादा का फायदा होता है। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, बैंगलोर जैसे महानगरों में जाने के लिए मची मारा-मारी का ये खूब फायदा उठाते हैं। जरूरतमंद लोगों से मनमाना पैसा वसूलते हैं।

जरूरतमन्दों से सौदा करते है एजेंट

आरक्षण कराने आए कुछ लोगों ने बताया कि वे सुबह से ही आए हैं, लेकिन नंबर लगाते समय कुछ लोगों ने दबाव बनाकर अपना नंबर पहले लगा लिया। जिसका फायदा दलाल उठाते हैं। गंतव्य तक जाने की जरूरत के कारण लोग इनसे सौदा करने को तैयार भी हो जाते हैं। दलाल और उनके एजेंट आरक्षण केन्द्रों में लाइन लगाकर टिकट ले रहे हैं। उन्हें रोकने या मना करने वाला कोई नहीं है। जबकि दलाल और उसके एजेंट आरक्षण केन्द्र में लाइन लगाकर टिकट नहीं ले सकते बल्कि सिर्फ अपने दफ्तर में बैठकर इंटरनेट से टिकट आरक्षित कर सकते है। रेलवे स्टेशन आरक्षण केन्द्र का अगर आप जायजा लेंगे तो पायेंगे कि 1, 2 व 3 नंबर काउंटर से लेकर अन्य काउंटर पर दलाल टिकट के लिए लाइन लगे हुए है। बकायदा काउंटर में बैठने वाले कर्मचारी भी उन्हें टिकट बनाकर देते दिखेंगे।

चंद सेकेंड में तत्काल टिकट के खेल में कई लोगो का हिस्सा

टिकट खिड़कियों पर रेल कर्मचारी भले ही आम लोगों से तमाम सवाल करें। लेकिन उनके खास जैसे ही अपना फार्म पकड़ाते हैं, उनका काम चंद सेकेंड में हो जाता है। इनसे कोई पूछताछ नहीं होती, जबकि लगभग कई चेहरे यहां रोज दिखाई देते हैं। ऐसे में आम आदमी मुंह देखता रह जाता है। सूत्रों की मानें तो सारा मामला सेटिंग-गेटिंग का होता है। टिकटों की कालाबाजारी में होने वाले फायदे में दलालों समेत कई लोगों का भी हिस्सा होता है। दलाल और उनके एजेंट एक साथ तीन से चार लोगों का टिकट करा रहे हैं। इसके बावजूद भी रेलवे अधिकारी उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं कर रहे हैं। जबकि आरक्षण केन्द्र में लाइन लगाकर टिकट लेने वाले दलालों और एजेंटे के लिए सजा का भी प्रावधान रखा गया है। चिन्हित दलालो को ब्लैक लिस्ट भी करने का प्रवधान है लेकिन आरा के किसी भी आरक्षण केन्द्र पर कार्यवाही नहीं की जा रही है। सुबह से लेकर शाम तक दलाल काउंटरों में पैर जमाकर खड़े रहते हैं।

टिकट कटाने में आम यात्री को होती है परेशानी

आम यात्रियों को टिकट कराने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ती है। उन्हें लम्बे लाइन में घंटे खड़ा रहना पड़ता है, लेकिन दलालों को आसानी से टिकट मिल रहा है। कई दफा तो लाइन इतनी लम्बी रहती है, कि टिकट कराने में सुबह से शाम हो जाती है और भूखे-प्यासे यात्री बैठे रहते हैं। सूत्रों की माने तो आरा जैसे शहर में 30 से भी ज्यादा एजेंट हैं। दलाल अधिकारियों की मिली भगत से दिनभर टिकट बुक कराते रहते हैं। यह नजारा आरक्षण केन्द्र पर खुलेआम देखा जा सकता है। आपको बता दे कि वर्ष 2010 में हाजीपुर जोन से दलालों पर करवाई करने के लिए टीम गठित कर छापेमारी किया गया था। जिसमे एक बडा दलाल धर्मन चौक से पकडा गया था। उसके बाद वर्ष 2011 में भी जगदीशपुर के दलाल पकड़ कर जेल भेजे गए थे। सूत्रों की माने तो उन लोगो के जेल से बाहर आने के बाद और भी बड़े पैमाने पर टिकट का गोरखधंधा चलने लगा है। हालाकि उसके बाद से अब-तक रेलवे विभाग ने किसी भी तरह की कोई बड़ी कार्यवाही नही की है।

कहा-कहा चलता है टिकट का गोरखधंधा

आरा शहर के चारो कोने पर यह गोरखधंधा चलता है। जिसमे पकड़ी चौक, मदन जी के हाता के पास, जज कोठी मोड़, ब्रिज होटल, धर्मन चौक, जेल रोड, कतीरा, नवादा चौक, जगदीशपुर, बिहिया, पीरो, कोइलवर प्रमुख है।

क्या कहते है पीआरओ

दानापुर रेल मंडल के पीआरओ संजय कुमार प्रसाद ने बताया कि आरा जंक्शन पर दलाल को अगर टिकट दिया जा रहा है तो कार्यवाही की जाएगी। दलालो पर नकेल कसने के लिए एक टीम गठित की जायगी। अगर दलाल का फोटो उपलब्ध हो तो उसको भेजे कार्यवाही की जायगी।

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