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Tuesday, 23 April 2019

निश्चित तनख्वाह उठाने के बाद आराम से कान में तेल डाल कर सोने में माहिर आरा का रेलवे प्रशासन

निश्चित तनख्वाह उठाने के बाद आराम से कान में तेल डाल कर सोने में माहिर आरा का रेलवे प्रशासन

आरा(डिम्पल राय/विक्रांत राय)। हर रोज ट्रेन दुर्घटनाओं से रूबरू होने के बावजूद दानापुर रेल मंडल का आरा रेलवे स्टेशन एक दिन में कई बार खतरों के खिलाड़ियों का मंच बना नजर आता है। राह चलते लोग रेलवे सुरक्षा अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए बंद फाटक के साथ-साथ खड़ी ट्रेनों के नीचे से भी निकलने में भी परहेज नही करते है। जबकि तमाम नियम-कानून के बावजूद रेलवे प्रशासन इनका पालन कराने में कोई रुचि नहीं लेता बल्कि हर महीने अपनी निश्चित तनख्वाह उठाने के बाद आराम से कान में तेल डाल कर सो जाता है। रेलवे क्रासिंग पर तैनात गेटमैन हो या प्लेटफार्म पर तैनात जीआरपी-आरपीएफ का जवान सभी इन घटनाक्रम को मूक दर्शक बन कर देखते रहते है या फिर मोबाईल से बात करने एवं चैटिंग करने में मशगुल रहते है। भले ही रेल दुर्घटनाओं का ग्राफ काफी तेजी से ऊपर की ओर बढ़ा हो फिर भी जल्दबाजी के चलते लोग अपनी जिंदगी की चिंता नहीं करते हैं। आपको बता दे कि रेलवे क्रासिंग पर ट्रेन गुजरने से पहले ही फाटक बंद कर दिया जाता है, जो ट्रेन पास होने तक नहीं खोला जाता लेकिन जल्दबाजी मे लोग उसी वक्त फाटक के नीचे से कभी खुद तो कभी बाईक झुका कर गुजर जाते हैं। कभी-कभी तो पटरी पर खड़ी ट्रेन के नीचे और बीच से गुजरने में भी लोग खौफ महसूस नहीं करते है। ऐसा नहीं है कि प्लेटफार्म पर स्थित जीआरपी व आरपीएफ थाना के पुलिसकर्मी यह सब देख नहीं रहे है बल्कि सब कुछ देखने और जानने के बावजूद लापरवाह बने हुए है। जिम्मेदार अधिकारी भी रेलवे अधिनियम का उल्लंघन करने वाले लोगों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं करते हैं। इस संबंध में आरा स्टेशन के जीआरपी प्रभारी राजनाथ राय ने आरपीएफ का कार्य क्षेत्र बता अपना पल्ला झाड़ लिया। वही आरपीएफ इंस्पेक्टर एस एन राम एवं स्टेशन प्रबंधक बी के पांडेय ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। ऐसे में आने वाला वक्त ही बताएगा की रेलवे प्रशासन इन दोषियों पर क्या कार्यवाही करती है और लोगो को जागरूक करने के लिए कितना कारगर कदम उठाती है।

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