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Saturday, 4 May 2019

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत की ऐतिहासिक जीत, विपक्ष हुआ बेनकाब

मृत्युंजय दीक्षित

आखिकार दस वर्षो की लम्बी लड़ाई और यूएन में चीन की ओर से चार बार वीटो के बाद तथा भारत के कूटनीतिक प्रयासों को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी सफलता मिल गयी है। काफी संधर्षो व धैर्य धारण के बाद सफलता हाथ लगना निश्चय ही एक सुखद क्षण होता है। यह हम सभी भारतवासियों के लिये गर्व की बात है कि अब पूरा विश्व आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत की आवाज को सुन रहा है तथा उसका साथ भी दे रहा है। भारत में आतंक का सरगना व जैश का सबसे कुख्यात सरगना मसूद अजहर अब अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित हो चुका है। पिछले एक दशक से अजहर के खिलाफ संयुक्तराष्ट्र की तरफ से प्रतिबंध घोषित करवाने में जुटे भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता उस समय मिली जब चीन ने अपना वीटो हटाकर अपना समर्थन कर दिया। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाइ्र्र में यह बहुत बड़ी जीत मानी जा रही है। भारत में लोकसभा चुनावों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के लिये भी राहतभरी खबर है। साथ ही एयरस्ट्राइक कासबूत मांग रहे लोगों के मुंह पर भी एक बहुत बड़ा तमाचा है।

पुलवामा हमलों के बाद तब बालाकोट में एयरस्ट्राइक की गयी तो उसके कुछ ही दिनोंं के बाद पूरा विपक्ष मोदी सरकार से कार्रवाइ के सबूत मांगने लगा था यहां तक कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पुलवामा हमले को दुर्घटना करार दे दिया जबकि कर्नाटक के नेताओें ने पूरे घटनाक्रम को मैच फिक्सिंग करार दे दिया था। यूएन में मसूद अजहर के बैन हो जाने के बाद अब विपक्ष इस मामले में पूरी तरह से धराशायी हो चुका है। भारत सरकार को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई्र में और मजबूती मिल गयी है तथा अब बचे हुए तीन चरणों में भाजपा इस मुददे को और अधिक आक्रामक तरीके से उठाने जा रही है जिसका लाभ भाजपा को अवश्य ही मिलेगा। अब भाजपा बहुत ही आक्रामक होकर पलटवार अपनी रैलियों में करने जा रही है जिसकी शुरूआत पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी जयपुर रैली से शुरू भी कर दी हैं। भाजपा के सभी नेता व उम्मीदवारों ने अपने तरीकों से इस बात का प्रचार प्रसार करना शुरू भी कर दिया है।

यह बात पूरी तरह से सही है कि यदि आज मसूद अजहर पर बैन लगा है तो इसमें पूरी तरह से मोदी सरकार को ही श्रेय मिलना चाहिये। चीन की ओर से लगातार चार बार वीटो किये जाने के बाद भी सरकार के कर्मठ राजनयिक व विदेश कूटनीतिक अधिकारी शांत नहीं बैठे और लगातार अपना काम करत रहे। कुख्यात आतंकवादी सरगना मसूद अजहर पर केवल पुलवामा हमले को ही आधार नहीं माना गया है अपितु भारत में अब तक जितने भी बड़े कायराना आतंकी हमले हुए हैं उन सभी को शामिल किया गया है। आज विपक्ष उसी बात को बहुत ही गलत तरीके से उठा रहा है।

इससे पूर्व चीन ने जब अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की तरफ से रखे गये प्रस्ताव के खिलाफ तब तकनीकी आधार पर वीटो लगा दिया था। तब विरोधी दलों के सभी नेताओं व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सोशल मीडिया पर पीएम मोदी व सरकार की नाकाम विदेश नीति पर हमला बोल दिया था। एक प्रकार से सरकार को नाकाम बताते हुए पीएम मोदी का पूरी ताकत के साथ मजाक बनाया गया था। आज अब उसी विपक्ष की आवाज पूरी तरह से बंद हो चुकी है लेकिन कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह सहित कइ्र्र नेताओं को यह बात रास नहीं आ रही है। पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही मसूद अजहर पर बैन लग गया है। अब चारों तरफ यही चर्चा हो रही है कि मसूद पर बैन के बाद कांग्रेस व विरोधी दलों के नेता पुलवामा व एयरस्ट्राइक के बाद सरकार पर जिस प्रकार के ओछे व दिशाहीन आरोप लगा रहे थे वह जनमानस के बीच पूरी तरह से बेनकाब हो चुके हैं। मसूद पर बैन के बाद जहां पाकिस्तान में और आतंकी संगठनों के बीच बहुत तेज खलबली मची हुयी है उसी प्रकार भारत के सभी विरोधी दलों के बीच भी महाखलबली मची हुयी।

जैसे एयरस्ट्राइक को लेकर सैम पित्रोदा ने बयान दिया था ठीक उसी प्रकार मसूद अजहर पर बैन लग जाने के बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से बहुत ही विकृत बयानबाजी हो रही है। लेकिन जनमानस के बीच वह बातें अच्छा असर डालने के बजाय बहुत ही विपरीत होती जा रही हैं तथा आम चुनावों में यह सब चीजें कांग्रेस के लिये बहुत अधिक घातक व मारक होने जा रही है। कांग्रेस पार्टी के हाथों से सारी चीजें अब निकलती जा रहीं हैं यह बातें जम्मू कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला भी कह रहे हैं। मसूद पर बैन के बाद कांग्रेस व विरोधी दलों के नेता सन्नाटे में आ गये हैं तथा अब आतंकवाद पर अपनी नाकामियों को छिपाने के लिये पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व राजीव शुक्ला तक को उतार दिया है लेकिन जनता अब कांग्रेस को अच्छी तरह से समझ चुकी है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दावा कर रहे हैं कि उनकी सरकार में भी सेना को पूरी तरह से आजादी थी।

वही राजीव शुक्ला दावा कर रहे हैं कि मनमोहन सरकार में छह बार एयरस्ट्राइक की गयी अगर मान भी लिया जाये कि उनकी सरकार में बहुत कुछ किया गया तब आज कश्मीर के हालात क्यों बिगड़ें। अब कांग्रेस के हाथ से पूरा खेल निकल चुका है तथा इनकी बातों का जनता के बीच कोइ असर नही जा रहा है। अगर वित्त मंत्री अरूण जेटली की बात पर ध्यान दिया जाये तो कांग्रेस सहित पूरा का पूरा विपक्ष राष्ट्रवाद, सीमा सुरक्षा व आतंकवाद पर बहुत ही घिनौनी व विकृत तथा अत्यंत तुच्छ राजनीति कर रहा है।

जिस गुजरात में माना जा रहा है कि कांग्रेस का पूरी तरह से सफाया हो चुका है वहां से कांग्रेस के नेता शंकर सिंह बाघेला ने बहुत ही आपत्तिजनक तरीके से बयान दिया है कि पुलवामा हमले की कार का पहला रजिस्ट्रेशन गुजरात का था ,यह कार किसकी थी इसकी जांच होनी चाहिये। एक प्रकार से कांग्रेस के नेतागण अपनी पूरी धूर्तता पर उतर आयें हैं। यह परोक्ष रूप से कह रहे हैं कि पुलवामा हमले में भी गोधरा जैसी ही साजिश रची गयी है और इसके सूत्रधार पीएम मोदी व अमित शाह ही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आजकल कांग्रेस के नेता शराब की बोतल में अपना चेहरा देखने की बजाय मोदी व अमित शाह का ही चेहरा देख रहे हैं। यह लोग मुस्लिम प्रेम में पूरी तरह से अंधे हो चुके है। अगर कांग्रेस का मुस्लिम तुष्टीकरण का प्रेम इसी प्रकार से चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब कांग्रेस व पूरा का पूरा विपक्ष पूरी तरह से समाप्त प्रायः हो जायेगा। कांग्रेस तो उठने लायक भी नहीं रह जायेगी।

मसूद अजहर पर आज कांग्रेस मोदी सरकार की सफलता नहीं मान पा रही है। कारण साफ है कि जिस पार्टी का हिंदू आतंकवाद का खेल पूरी तरह से समाप्त हो चुका है वही लोग एक बार फिर आग के साथ खेलना चाह रहे हैं। लेकिन अब कांग्रेस पूरी तरह से नंगी हो चुकी है कि वह वोट के लिये किसी भी सीमा तक जा सकती है। कांग्रेस आज भाजपा से यह भी पूछ रही है कि चीन के साथ क्या समझौता किया गया है? भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह बात पूरी तरह से साफ कर दी है कि भारत ने न तो किसी से समझौता किया है और न ही वह दुनिया के सामने किसी भी प्रकार के दबाव में आया हे। भारत की आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और आक्रामक नीतियां जारी हें।

यह बात तो पूरी तरह से सत्य है कि आज मसूद पर बैन लग जाने के बाद विपक्ष के खेमें में पूरी तरह से बौखलाहट है तथा सन्नाटा छा गया है। मसूद पर बैन लगाने से पहले चीन के सरकारी समाचारी पात्र ने एक लेख अपने सर्वे के साथ प्रकाशित किया था कि भारत के लोकसभा चुनावों के बाद वहां पर एक बार फिर मोदी सरकार की वापसी होने जा रही है इसके बाद ही मसूद अजहर पर चीन का रूख बदला है। लेकिन यह मीडिया रिर्पोटस भी आ रही हैं कि चीन सरकार इस मामले को लोकसभा चुनावों तक टालना चाह रही थी लेकिन अमेरिका के दबाव के कारण उसे तुरंत फैसला लेना ही पड़ गया।

यह भारत के राजनैतिक इतिहास का बहुत बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय है कि जब विपक्ष को सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिये था उस समय वह सरकार पर ओछे व विकृत आरोप लगाकर भारत की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। एक तरफ जहां आज पूरी दुनिया में भारत की आवाज को सुना जा रहा है उस समय देश का विपक्ष सरकार को गालियां दे रहा है। आज से दस साल पहले यूएन में भारत का समर्थन केवल रूस कर रहा था वहीं आज चीन सहित पूरा विश्व भारत की आवाज को सुन रहा है। भारत सरकार ने चीन को मसूद अजहर को सबूत सौंपे और चीन सरकार ने उन सबूतां पर अपनी सहमति जताते हुए यूएन में अपना वीटो पावर हटाने के लिये सहमत हो गया। अब विपक्ष के पास कोई तथ्य व तर्क नहीं रह गया है। आज पूरा विश्व आतंकवाद की लड़ाई में भारत के साथ खड़ा हो गया है। यह हमारे लिये बहुत ही गर्व की बात है जिस समय हमारे देश में सरकार का पूरे उत्साह व जोश के साथ समर्थन करना चाहिये था वहीं आज उसके खिलाफ चौकीदार चोर है के नारे लगवाये जा रहे है। यह भारतीय राजनीति की बेहद विकृत मृगतृष्णा व मृगमरीचिका है।

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