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Sunday, 5 May 2019

सबसे दर्दनाक और विनाशकारी रहा मोदी शासन: मनमोहन सिंह

नई दिल्ली: अपने शांत व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पीएम नरेंद्र मोदी पर जमकर जुबानी हमले किए। उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि मोदी का शासन भारत के युवाओं, किसानों, व्यापारियों के लिए ‘सबसे दर्दनाक’ रहा है। कांग्रेस के अनुभवी नेता ने दावा किया कि मोदी सरकार के पांच साल का कार्यकाल ‘शासन और जवाबदेही की विफलता की दुखद कहानी थी।

मोदी जी ने देश की जनता के साथ ‘अच्छे दिन’ का वादा करके सत्ता हासिल की थी। उनके पांच साल का कार्यकाल भारत के युवाओं, किसानों, व्यापारियों, व्यवसायों और हर लोकतांत्रिक संस्था के लिए सबसे दर्दनाक और विनाशकारी रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री ने एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘पीएम मोदी ने अपनी सरकार को अपमानजनक और अस्वीकार्य माना है, जबकि यूपीए सरकार हर तरह की जांच के लिए तैयार थी। मैंने हर तरह की जांच का स्वागत किया जबकि, पीएम मोदी भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपनी सरकार को अपमानजनक और अस्वीकार्य मानते हैं।’

मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि इस बार देश में किसी भी तरह की मोदी लहर नहीं है। देश के लोग ऐसी सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए तैयार हैं जो सबके विकास में विश्वास नहीं करती है। मोदी सरकार सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए सत्ता का इस्तेमाल कर रही है।पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व पीएम ने आरोप लगाया कि मोदी शासन के तहत पिछले पांच वर्षों में भ्रष्टाचार घटने की बजाय बढ़ता ही गया है।

एनडीए सरकार के शासन में सबसे बड़ा घोटाला ‘नोटबंदी’ था। मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के साथ ‘स्लिपशॉट’ नीति होने पर भी मोदी सरकार पर हमला किया और दावा किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर मोदी सरकार का रिकॉर्ड ‘निराशाजनक’ था। मोदी के शासन में आतंकवाद की घटनाओं ने जबरदस्त छलांग लगाई है।

मनमोहन सिंह इतने पर ही नहीं रूके और पुलवामा आतंकवादी हमले को लेकर भी मोदी सरकार की निंदा की। उन्होंने कहा कि पुलवामा में हुआ आतंकवादी हमला मोदी सरकार की ‘खुफिया विफलता’ का नतीजा था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के शासन के दौरान जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमलों में 176 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और पिछले पांच वर्षों में सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन 1,000 प्रतिशत बढ़ा है। पूर्व प्रधानमंत्री के वर्तमान पीएम पर हमले के बाद अब ये देखना दिलचस्प होगा कि पीएम मोदी मनमोहन सिंह के इन तीखे प्रहारों का जवाब किस प्रकार देते हैं।

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