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Monday, 6 May 2019

समझिये…खामोश है वोटर!

सबसे बडे लोकतांत्रिक हथियार का चुपचाप कर रहा प्रयोग

न चुनावी हो-हल्ला और न ही राजनीति वाली बतकही

रवि गुप्ता

लखनऊ। न पर्चा, न चर्चा और न ही दिखने वाला खर्चा…अबकी बार लोकतंत्र के इस महापर्व पर कुछ ऐसा ही स्थितियां देखने को मिल रही हैं। वोटर बड़ी ही खामोशी से अपने सबसे बडेÞ लोकतांत्रिक हथियार का प्रयोग करता नजर आ रहा है। 2019 लोकसभा चुनाव के अभी तक पांच फेज निकल गए और शेष तीन चरणों के मतदान बचे रह गए, मगर अभी तक न तो कोई चुनावी हो-हल्ला और न ही कोई बतकही…। राजनीतिक जानकारों का तो यह भी कहना है कि कहीं न कहीं नेताओं के हर दिन बदलते रंग-रूप और चाल-चरित्र को लगता है वोटरों ने पूरी तरह भांप लिया है, ऐसे में वो भी चुपचाप बिना किसी तामझाम के अपने मताधिकार को गुप्त रखने में विश्वास करने लगे हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पांचवें चरण के तहत सोमवार को वोटिंग हुई।

एक तो मतदान का दिन होने के नाते पहले से ही चौक-चौराहे, दुकानें बंद रहीं तो दूसरे तरफ अमूमन भीड़-भाड़ रहने वाले सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा दिखा। पूरे दिन वोटिंग के कम-ज्यादा होने का ग्राफ चढ़ता-उतरता रहा। पोलिंग बूथों के आसपास सुरक्षा कर्मी भी बडेÞ ही सहजता के साथ ड्यूटी करते दिखायी दिए। वहीं बूथों के नजदीक अलग-अलग पार्टियों ने जो कैम्प लगा रखे थे, वहां पर भी वोटरों के बीच कोई खास छटपटाहट नहीं दिखी। बस अपनी पर्ची ली, आगे बढेÞ, नाम मिलान किया और दबा दिया बटन। शहर का आलम यह रहा कि चाय-पानी, पान-पत्ता व नाश्ते आदि की भी छोटी-मझोली व गुमटी वाले दुकानें भी बंद रहीं। पार्कों में भी सुबह की सैर के बाद पूरे दिन चुनाव को लेकर स्थानीय लोगों के बीच किसी तरह धमाचौकड़ी नहीं दिखी।

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